अखिलेश यादव ने लगाया 'बिजनिसमैन' धनराज नाथवानी पर दांव, क्या अब राज्यसभा चुनाव में 8वां प्रत्याशी नहीं उतारेगी बीजेपी?
यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में जानिए राज्यसभा चुनाव में अखिलेश यादव के सरप्राइज उम्मीदवार धनराज नाथवानी का दांव, विधानसभा का पूरा वोट गणित और बीजेपी के आठवें उम्मीदवार पर खड़ा हुआ बड़ा धर्मसंकट.
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यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में आज हम राज्य की तीन बड़ी राजनीतिक खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं. आज की पहली बड़ी खबर है राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा रिलायंस ग्रुप से जुड़े धनराज नाथवानी को 'सरप्राइज कैंडिडेट' बनाकर दिया गया बड़ा झटका. दूसरी बड़ी खबर उत्तर प्रदेश विधानसभा का वो दिलचस्प अंकगणित है जिसके तहत सपा और बीजेपी के लिए अपनी-अपनी सीटें जिताने और क्रॉस वोटिंग कराने का समीकरण पूरी तरह बदल गया है. वहीं आज की तीसरी बड़ी खबर बीजेपी के सामने खड़ा हुआ वो धर्मसंकट है कि गुजरात और रिलायंस इकोसिस्टम से आने वाले इतने बड़े चेहरे के खिलाफ क्या पार्टी अपना आठवां उम्मीदवार उतारेगी या 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले क्रॉस वोटिंग के जोखिम से बचते हुए अपने कदम पीछे खींचेगी.
धनराज नाथवानी को उतारकर अखिलेश यादव का 'मास्टरस्ट्रोक'
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक ऐसा दांव चला है जिसकी भनक अंतिम समय तक किसी को नहीं थी. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के ग्रुप प्रेसिडेंट और कॉरपोरेट मामलों के निदेशक परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी को सपा का राज्यसभा प्रत्याशी बनाया गया है. धनराज नाथवानी का परिचय गुजरात के बड़े कॉरपोरेट और खेल जगत तक सीमित रहा है. वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं.
बीजेपी के दांव से बीजेपी को मात: अखिलेश यादव ने पहले ही संकेत दिया था कि वे बीजेपी को उसी की रणनीति से घेरेंगे. धनराज नाथवानी को मैदान में उतारकर सपा ने बीजेपी के उस प्लान पर पानी फेर दिया है जिसके तहत वह आसानी से अपना आठवां उम्मीदवार जिताने का दावा कर रही थी.
राज्यसभा चुनाव का अंकगणित: जानिए किस खेमे में कितने विधायक?
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 38 वोटों की आवश्यकता है. समाजवादी पार्टी का मौजूदा गणित इस प्रकार है.
सपा का मौजूदा आंकड़ा: 2022 में 111 सीटें जीतने वाली सपा के पास 4 विधायकों के सांसद बनने और 3 उपचुनाव हारने के बाद 102 विधायक बचे थे. हाल ही में घोसी से विधायक घोसी से विधायक के निधन के बाद यह संख्या 101 रह गई.
बागी और सहयोगी वोट: 4 बागी/गैर-मौजूद विधायकों को हटा देने पर सपा के पास 97-98 का मजबूत आंकड़ा बचता है. पल्लवी पटेल और कांग्रेस के 2 विधायकों को जोड़कर सपा के पास करीब 100 विधायकों का समर्थन है.
अतिरिक्त वोटों का गणित: दो सीटों के लिए 76 वोट निकालने के बाद सपा के पास 24 सरप्लस वोट बचते हैं. तीसरे प्रत्याशी (धनराज नाथवानी) को जिताने के लिए सपा को 14 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है.
छोटे दलों पर नजर: सपा की नजर सुभासपा (SBSP) के सपा बैकग्राउंड वाले विधायकों, आरएलडी (RLD) के असंतुष्ट विधायकों और अपना दल (एस) के कुछ चेहरों पर है. वहीं बीजेपी को अपना आठवां उम्मीदवार जिताने के लिए कम से कम 12 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा, जो अब आसान नहीं दिखता.
बीजेपी के सामने बड़ा धर्मसंकट: क्या वापस खिंचेगा आठवां उम्मीदवार?
धनराज नाथवानी के मैदान में आने से बीजेपी के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ गई है.
अपने ही इकोसिस्टम से मुकाबला: परिमल नाथवानी और धनराज नाथवानी को बीजेपी और रिलायंस इकोसिस्टम का बेहद करीबी माना जाता है. ऐसे में बीजेपी नेतृत्व के लिए यह विचारणीय प्रश्न बन गया है कि अपने ही तंत्र से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ जोखिम क्यों लिया जाए.
2027 चुनाव और नैरेटिव का डर: 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब बेहद करीब हैं. ऐसे समय में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग कराने या विधायकों की तोड़फोड़ से बीजेपी के खिलाफ एक नकारात्मक संदेश (नैरेटिव) बन सकता है.
रणनीतिक पुनर्विचार: राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी शायद 8वां प्रत्याशी उतारने का विचार त्याग दे और केवल 7 सीटों तक ही खुद को सीमित रखे. अगर ऐसा होता है तो अखिलेश यादव का यह सियासी मास्टरस्ट्रोक पूरी तरह सफल माना जाएगा.
