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'चवन्नी से रुपया बना दिया फिर भी छोड़कर चले गए...' जयंत चौधरी के उस बयान पर अखिलेश ने दिया रिएक्शन

अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के पुराने ‘चवन्नी’ वाले बयान पर तंज कसते हुए गठबंधन टूटने की कहानी याद दिलाई. लखनऊ में उन्होंने कहा कि चवन्नी को रुपया बनाया, फिर भी साथ छोड़कर चले गए। बयान पर सियासी बहस तेज है.

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Akhilesh on Jayant Chaudhary
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में रिश्ते कब बन जाएं और कब टूट जाएं इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है. कल तक जो नेता एक साथ मंच साझा करते थे आज वही एक-दूसरे पर राजनीतिक हिसाब-किताब साध रहे हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी पर जोरदार हमला बोला है. अखिलेश यादव ने जयंत के उस प्रसिद्ध बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मैं कोई चवन्नी नहीं हूं जो पलट जाऊंगा.'

लखनऊ में लोधी समाज के लोगों के साथ जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने गठबंधन की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा 'जाने कहां-कहां से आ गए थे गठबंधन वाले, हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया तब भी हमें छोड़ के चले गए.'

चवन्नी नहीं हूं जो पलट जाऊं- जयंत का वो पुराना बयान

कहानी की शुरुआत 27 जनवरी 2022 के उस बयान से होती है जब यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान जयंत चौधरी से दल-बदल को लेकर सवाल पूछा गया था. तब जयंत चौधरी ने बड़े आत्मविश्वास से कहा था 'मैं कोई चवन्नी थोड़ी हूं जो ऐसे करके पलट जाऊंगा.' उस वक्त जयंत चौधरी का इशारा साफ था कि वे अपने वादे के पक्के हैं और किसी फायदे के लिए गठबंधन नहीं तोड़ेंगे. हालांकि समय बदला और 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हवा का रुख भी बदल गया. जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन का हाथ थाम लिया.

''चवन्नी से रुपया बनाया फिर जेब बदल ली''

जयंत चौधरी के एनडीए में जाते ही अखिलेश यादव ने उनके ही पुराने बयान को हथियार बनाकर पलटवार किया. अखिलेश यादव के तंज का सीधा सियासी मतलब यह निकाला जा रहा है. जब जयंत चौधरी सपा के साथ आए थे तब उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर थी जिन्हें अखिलेश ने सांकेतिक रूप से चवन्नी कहा. सपा के साथ गठबंधन के बाद आरएलडी को राजनीतिक ताकत मिली और उनकी सीटें बढ़ीं ('चवन्नी से रुपया बनना'). लेकिन जैसे ही वे मजबूत हुए उन्होंने अखिलेश यादव का साथ छोड़ दिया और दूसरी राह चुन ली.

"चुनावी गर्मियों में कही बातों के मायने अलग होते हैं"

जब जयंत चौधरी से उनके चवन्नी वाले बयान पर दोबारा सवाल किया गया तो उन्होंने इसे चुनावी बयानबाजी करार देते हुए कहा 'चुनावी गर्मियों में जो बातें कही जाती हैं, उनके मायने अलग होते हैं. चुनाव खत्म हो गया, बात खत्म हो गई. चुनाव के पहले जो विपक्ष बोलता है उसे तो लोग वैसे ही भूल जाते हैं.' फिलहाल यूपी की राजनीति में 'चवन्नी से रुपया बनने' और 'चवन्नी के पलट जाने' की यह जुबानी जंग अब भी चर्चा का विषय बनी हुई है.