Opinion: योगी आदित्यनाथ के शासन में दिखा कठोरता और कोमलता का भाव, कब-कब बने अपराधियों के लिए काल और पीड़ितों का सहारा?
शामली में अंकित बालियान हत्याकांड में त्वरित कार्रवाई हो या जनता दर्शन में जरूरतमंद परिवारों की मदद. ये लेख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन के दो पहलुओं को सामने रखता है. लेखक ने इस लेख में योगी आदित्यनाथ का एक ओर अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख, तो दूसरी ओर पीड़ितों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने को लेकर कई पहलुओं को सामने रखा है.
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Opinion: यदि एक ही व्यक्तित्व में कठोरता और कोमलता की दो विपरीत धाराएं प्रवाहित होती दिखाई दें और दोनों ही व्यक्तित्व को संपूर्णता दें तो इसके मूल में न्याय की मूल भावना स्थायी रूप से निहित होती है. कठोरता अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करती और कोमलता किसी का दुख-दर्द दूर करने के लिए उद्यत करती है. माना जाता है कि जो शासक कानून के प्रति कठोर होगा, उसमें संवेदना की कमी दिखाई देगी, लेकिन प्रदेश की दो घटनाओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दो अलग-अलग स्वरूप देखने को मिले हैं. एक घटना में उनके हाथ में न्याय की तलवार दिखाई देती है, तो दूसरी में करुणा का दीपक. वह कानून-व्यवस्था के मामले में इतने अडिग हैं कि अपराधी को किसी कीमत पर बख्शने को तैयार नहीं और दूसरी ओर एक असहाय भाई की आंखों में उतरी पीड़ा उन्हें भीतर तक झकझोर देती है. यही द्वैत उन्हें एक सामान्य प्रशासक से कहीं आगे जनता के हृदय का शासक बनाता है और स्वीकारोक्ति देता है.

