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Opinion: हाईकोर्ट ने हलाला को गैंगरेप क्यों कहा? अमरोहा की उस FIR को रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमरोहा के कथित निकाह हलाला और पॉक्सो से जुड़े मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया. यह फैसला बताता है कि नाबालिग के साथ यौन अपराध के मामलों में धार्मिक प्रथा या पर्सनल लॉ आपराधिक कानून से ऊपर नहीं हो सकते.

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Opinion: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अमरोहा की जिस एफआईआर को रद्द करने से इनकार किया है, वह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है जिसमें धार्मिक रीति-रिवाज़ों की आड़ में एक नाबालिग लड़की का बार-बार यौन शोषण होता रहा. न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने जो टिप्पणी की, वह साफ़ है—आपराधिक कानून में पर्सनल लॉ की आड़ लेकर किसी अपराध से बचा नहीं जा सकता. यह टिप्पणी संक्षिप्त जरूर है, लेकिन इसके पीछे एक लंबी कानूनी और सामाजिक बहस छिपी है, जो सीधे तौर पर संविधान और पर्सनल लॉ से जुड़ी है.