Opinion: जब बाढ़ ने मचाई तबाही, योगी सरकार बनी भरोसे का सहारा! शून्य जनहानि ने दिखाया बदला हुआ यूपी
Opinion: कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राजधर्म के लिए एक नीति वचन है- ‘प्रजा सुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्.’ अर्थात शासक का सुख जनता के सुख में और उसका हित जनता के हित में निहित है.
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Opinion: कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राजधर्म के लिए एक नीति वचन है- ‘प्रजा सुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्.’ अर्थात शासक का सुख जनता के सुख में और उसका हित जनता के हित में निहित है. राजधर्म के इस नीति वचन में आस्था रखनेवाला व्यक्ति ही बाढ़ जैसी आपदा में जनता के हितों के प्रति संवेदनशील हो सकता है. बाढ़ की तबाही लोगों के भीतर का भरोसा हिला देती है. बाढ़ का पानी जब खेतों की मेड़ों को तोड़ता हुआ गांव की गलियों और घरों में प्रवेश करता है तो उसके साथ भय भी प्रवेश करता है. आंखों के सामने जीवन भर की कमाई डूबती दिखाई देती है. पशुधन बह जाने का डर, बच्चों-बुजुर्गों की चिंता और अगले दिन की अनिश्चितता. पिछले कुछ दिनों से ऐसे ही संकट से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह का राजधर्म निभाया है, वह लोगों के लिए बड़ा संबल है. उन्होंने लखनऊ में बैठकर अधिकारियों से रिपोर्ट लेने के बजाय स्वयं मोर्चे पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की. लोगों ने अहसास किया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है.

