इटावा में 45 साल बाद दलित परिवार को वापस मिली 5 बीघा जमीन, तारीफ करते नहीं थक रहे
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उत्तर प्रदेश के इटावा में 45 वर्षों बाद एक दलित परिवार को उनकी 5 बीघा जमीन वापस मिली. योगी सरकार के सख्त प्रशासनिक कदमों से यह संभव हुआ.परिवार की यह जीत न्याय व्यवस्था की कामयाबी और गरीबों के हक की रक्षा का उदाहरण है.
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है. सैफई तहसील के ग्राम नगला बने में भू-माफियाओं के डर से अपना घर-गांव छोड़कर किराए पर रहने को मजबूर एक दलित परिवार को करीब 45 सालों के लंबे इंतजार के बाद उनकी 5 बीघा जमीन का कब्जा वापस मिल गया है. वर्षों तक अधिकारियों के चक्कर काटकर हताश हो चुके इस परिवार को योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और भू-माफिया विरोधी अभियान से नया न्याय मिला है. जिस जमीन के लिए कभी परिवार के मुखिया की डिप्रेशन में मौत हो गई थी, आज उसी खेत में धान की फसल लहलहा रही है.
1980 के दशक में मिला पट्टा पर दबंगों ने कर लिया कब्जा
मामला साल 1987 के आसपास का है, जब सरकार की ओर से भूमिहीन दलित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पट्टे की जमीन बांटी गई थी. नगला बने गांव के एक दलित परिवार को भी 5 बीघा जमीन अलॉट हुई थी. लेकिन जमीन मिलते ही गांव के दबंगों ने बाहुबल के दम पर उस पर अवैध कब्जा कर लिया और पीड़ित परिवार को खेती नहीं करने दी.
गांव-घर बेचना पड़ा, डिप्रेशन में पिता की हुई मौत
पीड़ित परिवार ने तत्कालीन सरकारों के दौर में अधिकारियों की चौखट पर कई बार गुहार लगाई. लेकिन दबंगों के खौफ और प्रशासनिक अनदेखी के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई. दबंगों की धमकियों से तंग आकर परिवार को अपना पुश्तैनी मकान तक बेचकर इटावा शहर में किराए पर रहना पड़ा. परिवार दूसरों के कपड़े धोकर और मजदूरी करके पेट पालने लगा. अपनी जमीन छिन जाने के सदमे में परिवार के मुखिया डिप्रेशन में आ गए और उनका निधन हो गया.
योगी सरकार में जगी उम्मीद
पिता की मौत के बाद बड़े बेटे ब्रह्मपाल ने लड़ाई जारी रखी. उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने और भू-माफियाओं पर हो रही सख्त कार्रवाई को देखकर परिवार में उम्मीद जगी. ब्रह्मपाल ने स्थानीय बीजेपी नेता शरद और सैफई तहसील प्रशासन से संपर्क कर अपनी आपबीती सुनाई.
एसडीएम और पुलिस की टीम ने 45 साल बाद दिलाया कब्जा
मामला संज्ञान में आते ही सैफई की तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और पुलिस बल की संयुक्त टीम गांव पहुंची. प्रशासनिक अमले ने जमीन की पैमाइश कराकर दबंगों के चंगुल से 5 बीघा जमीन को पूरी तरह से मुक्त कराया और उसकी मेड़बंदी कराकर जमीन ब्रह्मपाल और उनकी मां देवेंद्र देवी को सौंप दी.
मजदूर से बने सम्मानित किसान
आज इस परिवार की जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है. जिस जमीन के लिए कभी आंसू बहाए जाते थे, आज उसी 5 बीघा खेत में लहलहाती धान की फसल परिवार की खुशहाली की गवाही दे रही है. पीड़ित ब्रह्मपाल और उनकी मां देवेंद्र देवी का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार न होतीतो शायद उन्हें कभी अपनी जमीन वापस नहीं मिलती. परिवार ने निष्पक्ष न्याय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल से धन्यवाद किया है.
