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BJP की अयाह शाह सीट क्या 2027 में जीत पाएगी सपा? समझिए पूरा समीकरण

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले फतेहपुर की अयाह शाह सीट पर सियासी हलचल तेज है. विधायक विकास गुप्ता के विकास कार्यों, सपा की रणनीति, जातीय समीकरण और संभावित एंटी-इनकंबेंसी के बीच बीजेपी और विपक्ष की तैयारियां चर्चा में हैं.

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Akhilesh Yadav and CM Yogi
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उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सूबे की हर सीट का सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगा है. बात अगर फतेहपुर जिले की महत्वपूर्ण अयाह शाह विधानसभा सीट की करें तो 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) का प्रभाव था. लेकिन 2017 के बाद से यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है. वर्तमान में भाजपा के विकास गुप्ता यहां से विधायक हैं. ऐसे में 2027 के रण से पहले इस सीट पर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं.

अयाह शाह सीट का राजनीतिक इतिहास

बसपा का दौर: फतेहपुर में 2008 से पहले 'हसवा' विधानसभा हुआ करती थी जिसे बाद में परिसीमन के बाद 'अयाह शाह' नाम दिया गया. साल 2012 के चुनाव में बसपा के टिकट पर अयोध्या प्रसाद पाल ने यहां से जीत दर्ज की थी.

भाजपा का कब्जा: 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री राधेश्याम गुप्ता के बेटे विकास गुप्ता के मैदान में उतरने के बाद यहां पहली बार कमल खिला। इसके बाद 2022 के चुनाव में भी विकास गुप्ता ने जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार विधायक बनकर अपनी पकड़ मजबूत की.

विधायक विकास गुप्ता के दावे और विकास कार्य

मौजूदा विधायक विकास गुप्ता का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में संकल्प पत्र के वादों को पूरा किया है. उनके मुताबिक क्षेत्र में मिनी स्टेडियम, नगर पंचायत का गठन, डाक बंगले का निर्माण, और दलौली बस स्टेशन का सौंदर्यीकरण जैसे काम हुए हैं. साथ ही उनका लक्ष्य क्षेत्र में एक नया इंडस्ट्रियल पार्क और विश्वविद्यालय स्थापित करना है ताकि यहां के युवाओं को रोजगार और शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े.

समाजवादी पार्टी की तैयारी और जातीय समीकरण

सपा का पलटवार: समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र यादव का कहना है कि पिछले चुनाव में कुछ कमियों के कारण हार मिली थी. लेकिन इस बार पार्टी पूरे दमखम से मैदान में उतरेगी और जनता इस बार बदलाव का मन बना चुकी है.

जातीय आंकड़े: अयाह शाह विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 2,51,000 है. यहां पिछड़े वर्ग (लगभग 1,15,000) और दलित मतदाताओं (लगभग 55,000) की संख्या निर्णायक मानी जाती है. इसके अलावा क्षत्रिय (26,000), ब्राह्मण (24,000) और मुस्लिम मतदाता (15,000) भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

स्थानीय पत्रकारों और विश्लेषकों की राय

क्षेत्रीय पत्रकारों के अनुसार, इस बार का मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच टू-वे होता दिख रहा है. हालांकि, मौजूदा विधायक विकास गुप्ता के खिलाफ स्थानीय स्तर पर कुछ एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी रुझान) की चर्चा भी है जिसका लाभ विपक्षी दल उठाना चाहेंगे. वहीं, एआईएमआईएम (AIMIM) की सक्रियता और मुस्लिम वोटों के बिखराव की चर्चा भी सियासी गलियारों में है जो अंततः चुनावी समीकरणों को बड़ा फेरबदल दे सकती है.

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