Opinion: राजनीति अपनी जगह और संस्कार अपनी जगह, जब अखिलेश यादव की बेटी के सम्मान में उतरे सीएम योगी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया कदमों की चर्चा तेज है. अखिलेश यादव की बेटी पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए योगी ने राजनीतिक मर्यादा और राजधर्म का संदेश दिया.
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Opinion: राजनीति में प्रतिद्वंद्विता का अपना व्याकरण होता है और कोई भी राजनेता अपने विरोधी पर आक्रमण से नहीं चूकता. ऐसा स्वाभाविक भी है क्योंकि हर दल की अपनी विचारधारा होती है, चुनावी रणनीतियां होती हैं और इसी के आधार पर जनता उनका आकलन करती है. लेकिन, जब कोई शासक दलगत सीमाओं को लांघकर समाज के समग्र हित में खड़ा होता है, तो वह राजनीति में विशिष्ट दिखाई देने लगता है. वह राजधर्म का पालन करने वाले शासक के रूप में दिखाई देने लगता है. ऐसे समय में जबकि राजनीतिक संस्कृति का क्षरण होने लगा है, जहां विरोधी दल के नेता को शत्रु मानकर बयानबाजियां की जाने लगी हैं, यहां तक कि परिवार तक को निशाने पर लिया जाने लगा है, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधर्म का पालन करते हुए राजनीति का आदर्श प्रस्तुत करते हुए एक सामान्य राजनेता से ऊपर दिखाई देते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी को लेकर जब कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री फैलाई तो सीएम योगी ने न सिर्फ इसे गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया बल्कि आजमगढ़ में सभा के दौरान ऐसे लोगों को स्पष्ट संदेश भी दिया- ‘बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं है. बेटी तो बेटी है. हम उन संस्कारों में पले-बढ़े हैं जहां गांव की बेटी सबकी बेटी होती है, बहन पूरे गांव की होती है.’ ऐसे संकल्प मुख्यमंत्री के सांस्कारित सामाजिक बोध को दर्शाते हैं.