Opinion: आखिर चाहते क्या हैं अखिलेश यादव?
ओपिनियन: कभी मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले अखिलेश यादव अब अचानक राम मंदिर के चढ़ावे पर पारदर्शिता का सवाल क्यों उठा रहे हैं? पढ़िए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और गोसंरक्षण के मुद्दों पर सपा के दोहरेपन की इनसाइड स्टोरी.
ADVERTISEMENT

अखिलेश यादव
Opinion: किसी भी विषय को सुनियोजित ढंग से मुद्दा बनाना या फिर किसी अवसर से राजनीतिक लाभ हासिल करना राजनीति का ही हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि क्या आस्था और धर्म से जुड़े विषय भी इसके अंग हो सकते हैं. क्या धर्म की चादर ओढ़कर समाज को छलने के प्रयास को भी राजनीति का हिस्सा माना जाना चाहिए. जब भी ऐसी कोशिशें की जाएं तो उसे राजनीतिक चतुरता नहीं माना जा सकता, बल्कि यह समझना चाहिए कि वोटों की खातिर षडयंत्र रचने के प्रयास किए जा रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बीच राम मंदिर में चढ़ावे पर जो बयान दिए हैं या फिर उससे पहले की उनकी जो गतिविधियां रही हैं, उन्हें राजनीतिक छल से अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता. अब एक बड़ा सीधा सा प्रश्न है कि इसके पीछे उनकी मंशा क्या है? आखिर चाहते क्या हैं अखिलेश यादव?
