Opinion: कैसे कांवड़ यात्रा जोड़ती है समाज को? जानिए ‘बोल बम’ का वास्तविक संदेश
Opinion: कांवड़ यात्रा सामाजिक समरसता, साझा आस्था और शिवभक्ति का प्रतीक है. जानिए कैसे 'बोल बम' का सनातन संदेश प्रेम, समानता और लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करता है.
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किसी भी समाज में प्रेम, सहयोग और समरसता का वातावरण तब स्वतः निर्मित होता है, जब व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर भक्ति का पथ अपनाता है. कांवड़ यात्रा इसी सत्य का सजीव प्रतीक है. मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना की यह एक विराट यात्रा है जिसमें जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति और सामाजिक भेदभाव गौण हो जाते हैं. कांवड़ यात्रा हमारे लिए यह बड़ी सीख भी है कि सामाजिक समरसता किसी उपदेश से नहीं, बल्कि साझा आस्था, सहभागिता और परस्पर सम्मान से विकसित होती है और इसे वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप में देखा भी जा सकता है जबकि एक साथ हजारों लोग कंधे पर गंगाजल लिए शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं. विविधताओं के बीच एकात्मता का यह दृश्य इस सावन में जीवंत हो उठा है. प्रेम, सेवा, सह-अस्तित्व और सामाजिक समरसता पर टिकी हुई यह श्रद्धा यात्रा वह आध्यात्मिक शक्ति है जो लोगों को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित से जोड़ती है. इस सामूहिक अनुशासन के पीछे एक साक्षा पहचान है-भोला. यानि वह संज्ञा जो मनुष्य को शिव से एकाकार करती है.
