Opinion: कांवड़ यात्रा में नजर आती है भक्ति के साथ सामाजिक एकता की ताकत, सनातन परंपरा और समरस समाज की पहचान
Opinion: हमारे मनीषियों ने पूर्व में ही कहा है कि ‘संघे शक्ति कलियुगे’. अर्थात वर्तमान युग में सबसे बड़ी शक्ति संगठन और सामूहिकता की है. हमारी सनातन सांस्कृतिक चेतना का यही मूल स्वर रहा है कि आस्था केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला सेतु है.
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Kanwar Yatra Opinion (Photo: AI)
हमारे मनीषियों ने पूर्व में ही कहा है कि ‘संघे शक्ति कलियुगे’. अर्थात वर्तमान युग में सबसे बड़ी शक्ति संगठन और सामूहिकता की है. हमारी सनातन सांस्कृतिक चेतना का यही मूल स्वर रहा है कि आस्था केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला सेतु है. कांवड़ यात्रा इसी सूत्र वाक्य का जीवंत प्रमाण बनकर प्रतिवर्ष श्रावण मास में साकार होती है, जब लाखों-करोड़ों शिवभक्त कंधे पर गंगाजल लेकर मीलों की पदयात्रा करते हैं और सामाजिक भेद-भाव की समस्त दीवारें ढहा देते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा को अपनी सामाजिक प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए इसी चेतना को स्वर दिया और इसे राजकीय गरिमा और उत्सव के रूप में स्थापित किया. कांवड़ यात्रा से उठनेवाली गूंज वस्तुतः हमारी सनातन एकता का उद्घोष है, जो पूरे समाज को शक्ति प्रदान करता है.
