Opinion: कसरवल की गोलियों से श्रृंगवेरपुर के 579 करोड़ तक, जानिए यूपी की राजनीति में कैसे बदला निषाद समाज का कद
उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज की भूमिका पिछले एक दशक में बदली है. 2015 के कसरवल आंदोलन से लेकर योगी सरकार में संजय निषाद के कैबिनेट मंत्री बनने और श्रृंगवेरपुर में निषादराज की विरासत को सरकारी पहचान मिलने तक, निषाद राजनीति का एक नया दौर दिखाई देता है.
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Opinion: उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज के बदलते कद की कहानी सिर्फ चुनावी आंकड़ों की कहानी नहीं है. यह उस राजनीतिक बदलाव की कहानी भी है, जिसमें एक दौर में निषाद समाज के सामने पहचान का संकट था, उसकी बात सुनी नहीं जाती थी. सरकारें उनकी मांगों को कुचलने का काम करती थी. लेकिन आज उसी समाज की सत्ता में हिस्सेदारी भी है और उसकी विरासत को नई पहचान भी मिल रही है. इस बदलाव को समझने के लिए हमें अतीत और वर्तमान में हो रहे बदलावों को समझना होगा.

