Opinion: इटावा में शिव मंदिर तो बना रहे अखिलेश, लेकिन कांवड़ियों को 'अनपढ़-बेरोजगार' कहने वाले सपाइयों के 'सनातन द्रोह' का सनातनी कैसे भूलेंगे हिसाब?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पिछले कुछ दिनों से खुद को शिवभक्त साबित करने की होड़ में लगे हैं. वे इटावा में भव्य केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं. इतना ही नहीं, जो अखिलेश यादव अपनी सरकारों में कांवड़ियों पर पाबंदियों का चाबुक चलाते थे...
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Opinion: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पिछले कुछ दिनों से खुद को शिवभक्त साबित करने की होड़ में लगे हैं. वे इटावा में भव्य केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं. इतना ही नहीं, जो अखिलेश यादव अपनी सरकारों में कांवड़ियों पर पाबंदियों का चाबुक चलाते थे, वे पिछले कुछ समय से अचानक कांवड़ियों के लिए 'स्पेशल कॉरिडोर' बनाने की मांग करने लगे हैं. जाहिर है, यह समाजवादी पार्टी का नया 'सॉफ्ट हिंदुत्व' है, जो सियासी मजबूरी से उपजा है. लेकिन, क्या छवि को सुधारने की इन कोशिशों से समाजवादी पार्टी के पुराने पाप धुल जाएंगे? क्योंकि यूपी में जब भी कांवड़ यात्रा का जिक्र आता है, समाजवादी पार्टी का असली 'सनातन विरोधी' चेहरा बेनकाब हो जाता है. खुद को शिवभक्त बताने वाले अखिलेश यादव और उनके नेताओं ने हमेशा कांवड़ियों को 'अनपढ़', 'बेरोजगार' और 'नफरती' बताकर सरेआम अपमानित किया है. ऐसे में, एक तरफ मंदिर बनवाने का दिखावा और दूसरी तरफ सनातनियों की आस्था को गालियां...आइये, सपा की इस दोमुंही अवसरवादी राजनीति और इसके विपरीत योगी सरकार के 'विरासत और विकास' मॉडल की परत-दर-परत पड़ताल करते हैं.
