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BSNL के डायरेक्टर विवेक बंजल के आने की खबर मिलते ही अधिकारियों को मिली अंडरगारमेंट्स से लेकर तौलिया संभालने की जिम्मेदारी

Prayagraj News: BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल का प्रयागराज दौरा शाही प्रोटोकॉल वायरल होने के बाद रद्द कर दिया गया है. संगम स्नान के दौरान अंडरगारमेंट्स और तौलिया संभालने के लिए 50 अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी. सोशल मीडिया पर फजीहत और भारी विरोध के बाद विभाग ने दौरा निरस्त करने का फैसला लिया.

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Prayagraj News: क्या आपने कभी सुना है कि किसी सरकारी अफसर के दौरे के लिए 50 से ज्यादा अधिकारियों की फौज सिर्फ इसलिए लगा दी जाए कि उनके अंडरगारमेंट्स और तौलिये का ख्याल रखा जा सके? सुनने में यह किसी रियासत के राजा का प्रोटोकॉल लग सकता है. लेकिन यह हकीकत है सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL के एक डायरेक्टर के प्रस्तावित प्रयागराज दौरे की. संगम नगरी में डुबकी लगाने से पहले ही शाही इंतजामों का कच्चा चिट्ठा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसके बाद ऐसी किरकिरी हुई कि आनन-फानन में पूरा दौरा ही रद्द करना पड़ा.

क्या है पूरा मामला?

मामला BSNL के डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे से जुड़ा है. उनके आगमन के लिए 19 फरवरी को डीजीएम स्तर से एक 'मिनट-टू-मिनट' प्लान जारी किया गया था. इस प्रोटोकॉल में हैरान कर देने वाली बात यह थी कि डायरेक्टर साहब के निजी सामान यहां तक कि उनके अंडरगारमेंट्स को संभालने, स्नान के बाद तौलिया देने और कपड़े सहेजने तक के लिए अलग-अलग अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी. कुल मिलाकर 50 से अधिक कर्मचारी सिर्फ एक व्यक्ति की 'सेवा' में मुस्तैद किए गए थे.

सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक

जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया पर लीक हुआ इंटरनेट पर तहलका मच गया. यूजर्स ने इसे अंग्रेजों के जमाने का वीआईपी कल्चर और सरकारी पैसे की बर्बादी बताया. लोगों ने सवाल उठाया कि एक घाटे में चल रही सरकारी कंपनी का अफसर इतनी विलासिता और इतने बड़े प्रोटोकॉल का हकदार कैसे हो सकता है? सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से और ट्रोलिंग ने उच्च अधिकारियों के कान खड़े कर दिए.

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चारों तरफ से घिरने के बाद प्रशासन ने बचाव की मुद्रा अपना ली. BSNL के जनसंपर्क अधिकारी आशीष गुप्ता ने पुष्टि की है कि डायरेक्टर विवेक बंजल का 25 फरवरी का प्रयागराज दौरा निरस्त कर दिया गया है. विभाग ने सफाई दी कि जारी किया गया वह विस्तृत प्रोटोकॉल अब अमान्य माना जाए. हालांकि विभाग ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि आखिर इतना शर्मनाक और विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार करने की नौबत क्यों आई.