मेरठ सौरभ हत्याकांड केस में फांसी की सजा से सदमे में आए मुस्कान-साहिल, बिना खाए-पिए कटी जेल में पहली रात
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Meerut Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी मुस्कान और साहिल चौधरी चरण सिंह जिला जेल में बंद हैं. सजा के ऐलान के बाद दोनों दोषियों की जेल में पहली रात काफी बेचैनी और रोते हुए कटी.
Meerut Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी मुस्कान और साहिल चौधरी चरण सिंह जिला जेल में बंद हैं. सजा के ऐलान के बाद दोनों दोषियों की जेल में पहली रात काफी बेचैनी और रोते हुए कटी. जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीरेश राज ने बताया कि फांसी की सजा मिलने के बाद दोनों गहरे सदमे में हैं और उन्होंने रात का खाना भी नहीं खाया. अब जेल में उनकी पहचान नाम से नहीं बल्कि कैदी नंबर से होगी. दोनों को जेल के कपड़े दे दिए गए हैं और उनकी कड़ी सुरक्षा के साथ-साथ लगातार काउंसलिंग भी की जा रही है.
दोनों को मिले नए कैदी नंबर
जेल अधीक्षक ने बताया कि अदालत का आदेश मिलने के बाद दोनों को कैदी नंबर दे दिए गए हैं. साहिल का कैदी नंबर 395/2026 और मुस्कान का कैदी नंबर 396/2026 है. अब दोनों जेल में नाम के बजाय इन्हीं नंबरों से पहचाने जाएंगे. इसके साथ ही उन्हें जेल के कपड़े भी दे दिए गए हैं. साहिल को दो जोड़ी सफेद कुर्ता-पायजामा और मुस्कान को एक साड़ी व एक सूट दिया गया है. सुरक्षा को देखते हुए साहिल को 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में और मुस्कान को महिला बंदी रक्षक की विशेष देखरेख में रखा गया है.
गहरे सदमे में हैं दोनों कैदी
अदालत से फांसी की सजा सुनने के बाद दोनों कैदी गहरे सदमे में आ गए हैं. उन्हें उम्मीद थी कि शायद आजीवन कारावास की सजा मिलेगी, लेकिन मौत की सजा सुनकर वे फूट-फूट कर रोने लगे. दोनों की मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने डॉक्टरों की मदद से उनकी काउंसलिंग कराई है. दोनों ने अपनी मर्जी से जेल में काम करने की इच्छा भी जताई है. मुस्कान जेल के अंदर सिलाई और कढ़ाई का काम करेगी, जबकि साहिल पहले की तरह ही कृषि और बागवानी का काम करेगा.
कानूनी प्रक्रिया और परिवार से मुलाकात
मुस्कान के साथ जेल में उसकी छोटी बेटी भी है, जो नियमों के अनुसार छह साल तक अपनी मां के साथ रह सकती है. मुस्कान अपनी बड़ी बेटी और माता-पिता से भी मिलना चाहती है, जिसके लिए उसने पत्र लिखने की अनुमति मांगी है. जेल प्रशासन का कहना है कि अगर परिजन आते हैं, तो यूपी जेल मैनुअल के हिसाब से उनकी मुलाकात कराई जाएगी. इसके अलावा, सजा के खिलाफ अब जेल प्रशासन की मदद से हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की लंबी कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
