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‘मैं दोनों को मृत्युदंड देता हूं...’ मेरठ में जब मुस्कान और साहिल को सुनाई गई फांसी की सजा, तब उन 6 घंटों में क्या क्या हुआ?

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाने से पहले कोर्ट में छह घंटे तक क्या हुआ? वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलों से लेकर जज के फैसले तक जानिए पूरा घटनाक्रम.

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मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने 14 अक्टूबर को एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस मामले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में क्या कुछ हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम बेहद रोमांचक और चौंकाने वाला है. आइए जानते हैं कि उस दिन कोर्ट के अंदर उन 6 घंटों में आखिर क्या-क्या हुआ था.

सुबह 10 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई शुरुआत

14 अक्टूबर की सुबह ठीक 10:10 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा अपनी अदालत में कुर्सी पर बैठे. सरकारी और बचाव पक्ष के वकील पहले से मौजूद थे. कार्यवाही की शुरुआत के साथ ही मेरठ जेल के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम से दोनों आरोपी मुस्कान और साहिल कैमरे के सामने जोड़े गए.

जज साहब ने जब मुस्कान से पूछा कि क्या उसे पता है कि आज सजा सुनाई जाने वाली है और उसे कुछ कहना है, तो वह पूरी तरह खामोश रही और सिर्फ हां में सिर हिलाया. इसके बाद जज ने साहिल से सवाल किए. साहिल ने बताया कि वह ग्रेजुएट है और सीए बनना चाहता है. इसके बाद वीसी बंद कर दी गई.

दोपहर 12:15 बजे तक चली वकीलों की लंबी बहस

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग खत्म होने के बाद कोर्टरूम में सजा को लेकर गरमा-गरम बहस शुरू हुई.

बचाव पक्ष के तर्क: वकीलों ने दलील दी कि दोनों की उम्र कम है, यह उनका पहला अपराध है और जेल में पिछले डेढ़ साल से उनका आचरण अच्छा रहा है. मुस्कान अपना ज्यादातर समय पूजा-पाठ में बिताती है. इसलिए मौत की सजा की बजाय उन्हें उम्रकैद दी जाए.

सरकारी वकील के कड़े तर्क: अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह कोई अचानक हुआ कत्ल नहीं था बल्कि बेहद क्रूरता के साथ लाश के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने की सोची-समझी साजिश थी. जेल में अच्छे बर्ताव या पूजा-पाठ के आधार पर ऐसे जघन्य अपराध में नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. दोनों के लिए अधिकतम सजा यानी मौत की सजा की मांग की गई.

बहस पूरी होने के बाद दोपहर 12:15 बजे जज साहब अपने चैंबर में चले गए. उस दिन वकीलों की हड़ताल के कारण पूरी अदालत लगभग बंद थी, केवल फैसले और जमानत मामलों की ही अनुमति थी.

शाम 4 बजकर 10 मिनट पर सुनाया गया फैसला

दोपहर बाद जब शाम के 4:10 बजे जज साहब दोबारा कोर्टरूम में लौटे तो कमरा खचाखच भरा हुआ था. एक बार फिर मेरठ जेल से मुस्कान और साहिल को स्क्रीन पर जोड़ा गया. कोर्ट में आते ही जज साहब ने मुस्कुराते हुए वकीलों से कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है. इसके बाद उन्होंने महाभारत का एक अंश पढ़ा और स्पष्ट शब्दों में कहा 'दंड ही धर्म है.'

इसके ठीक बाद, स्क्रीन पर देख रहे मुस्कान और साहिल से जज साहब ने सिर्फ एक लाइन में कड़ा फैसला सुनाया 'आपके किए अपराध के लिए मैं आप दोनों को मृत्युदंड देता हूं.'

भारत माता की जय के नारे और फैसले पर हस्ताक्षर

फैसला सुनते ही कोर्टरूम में मौजूद लोगों के बीच 'भारत माता की जय' के नारे गूंजने लगे. शोरगुल के बीच आगे की आवाज दब गई. अंततः शाम के ठीक 4:16 बजे जज साहब ने बॉल पेन से मौत की इस सजा के दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर किए और कार्यवाही पूरी हुई.


( इनपुट: शम्स ताहिर खान )

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