कानपुर: 12वीं, CUET में किया टॉप, CM से मिला सम्मान पर गरीबी ऐसी कि DU में नहीं हुआ दाखिला

कानपुर: 12वीं, CUET में किया टॉप, CM से मिला सम्मान पर गरीबी ऐसी कि DU में नहीं हुआ दाखिला
फोटो: सूरज सिंह

Kanpur News: कानपुर देहात के अकबरपुर की एक छात्रा ने 12वीं में जिला टॉप करके जिले का नाम रोशन किया था. लखनऊ में बुलाकर उसे योगी सरकार ने सम्मानित भी कर दिया, लेकिन आज वह अपनी आर्थिक समस्याओं के कारण आगे नहीं पढ़ पा रही है और आईएएस अधिकारी बनने का उसका सपना पूरा नहीं हो रहा है.

यह छात्रा कानपुर देहात के अकबरपुर काशीराम कॉलोनी में रहती है. यहां रहने वाले उमेश चौरसिया की बेटी सेजल चौरसिया ने इंटर में जिला टॉप किया था. छात्रा का सम्मान जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक ने किया था, लेकिन उसके बाद छात्रा को सभी ने भुला दिया और किसी की तरफ से आगे पढ़ाई के लिए कोई भी सहायता सामने नहीं आई.

आर्थिक हालत है कमजोर

छात्रा के पिता की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है. छात्रा ने अपनी शिक्षा के दम पर दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला हासिल किया लेकिन आर्थिक कमजोरी की वजह से वहां वह एडमिशन नहीं ले पाई. छात्रा सेजल का सपना आईएएस बनने का है लेकिन उसके सपने में सबसे बड़ी रोक परिवार की आर्थिक कमजोरी हैं. छात्रा जानकारी देते हुए बताती है कि उसके इंटर में 91.4 प्रतिशत नंबर आए थे और जिले में पहला स्थान प्राप्त किया था.

सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट में भी पहला स्थान

छात्रा ने अपनी शिक्षा और मेहनत के बल पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट में भी टॉप किया लेकिन आर्थिक समस्याओं की वजह से वह कहीं एडमिशन नहीं ले पाई. छात्रा जानकारी देते हुए बताती है कि जब उसने टॉप किया था तब राज्य सरकार ने उसे लखनऊ बुलाकर उसका सम्मान किया था, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आया.

पिता करते हैं फैक्ट्री में मजदूरी

छात्रा के पिता उमेश चौरसिया कन्नौज जिले के रहने वाले हैं. वह 20 साल पहले नौकरी के लिए कानपुर आ गए थे. पिता परिवार चलाने के लिए फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. सेजल उनकी अकेली संतान है. छात्रा के पिता अपनी बेटी के सपनों को पूरा करना चाहते हैं. उसके लिए वह फैक्ट्री में दिन-रात काम करते हैं लेकिन फिर भी वह बेटी की पढ़ाई का खर्चा नहीं उठा पा रहे हैं. पिता कहते हैं कि, अगर बेटी को सहायता मिल जाती तो उसकी पढ़ाई का इंतजाम हो जाता और वह दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन ले पाती. उसका सपना आईएएस बनकर गरीब बच्चों के लिए काम करना है. उन्होंने कहा कि, मैं अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा हूं लेकिन आर्थिक हालत बेहद खराब है इसलिए अब मेरी बेटी का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

एक कमरे में रहता है परिवार

सेजल की मां की सेहत खराब रहती है. वह कहती हैं, मैंने सोचा था कि सरकार से कुछ मदद मिल जाएगी और बेटी आगे पढ़ पाएगी, लेकिन कही से मदद नहीं मिली. उन्होंने कहा कि, हमें जानकारी नहीं है कि किस तरह से मदद की गुहार लगाई जाए. बता दें कि परिवार काशीराम कॉलोनी में एक छोटे कमरे में रहता है. उसी के एक हिस्से में बेटी रहती है और पढ़ाई करती है.

बता दें कि हर साल योगी सरकार 12वीं के मेघावी छात्रों का सम्मान करती हैं और उन्हें लखनऊ बुलाती है. परिवार का कहना है कि अगर बेटी को आर्थिक मदद मिलती है तो वह जरूर अपने सपनों को पूरा करेगी और सरकारी अधिकारी बनकर दिखाएगी.

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