गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव क्या निकाल ले जाएंगे संजयन त्रिपाठी? पत्रकारों ने क्या बताया
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में भाजपा समर्थित ध्रुव कुमार त्रिपाठी और सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के बीच मुकाबला चर्चा में है. महिला मतदाताओं का उत्साह, पुरानी पेंशन बहाली और शिक्षकों की समस्याएं चुनाव के प्रमुख मुद्दे बने हैं.
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए हो रहे मतदान के दौरान सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है. गोरखपुर के एक मतदान केंद्र पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों और स्थानीय जानकारों से बातचीत में यह सामने आया कि इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा समर्थित उम्मीदवार और सपा खेमे में गए बागी प्रत्याशी के बीच सिमटा नजर आ रहा है. महिला मतदाताओं में भारी उत्साह और शिक्षकों के मुद्दों के बीच इस चुनाव के समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं.
महिला मतदाताओं का उत्साह
सभी बूथ पर महिला शिक्षकों और मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. दोपहर तक मतदान का आंकड़ा काफी संतोषजनक स्तर पर पहुंच चुका था. शिक्षिकाओं और शिक्षकों का मुख्य फोकस पुरानी पेंशन बहाली (OPS), शैक्षिक स्तर में सुधार, पेपर लीक जैसी समस्याओं और शिक्षकों की सुरक्षा तथा सम्मान से जुड़े मुद्दों पर रहा.
चर्चा के दौरान यह बात भी उठी कि आज के समय में शिक्षक और शिक्षिकाएं दोनों तरफ से पिस रहे हैं. एक तरफ बच्चों को नियंत्रित करने पर अभिभावकों की आपत्ति और दूसरी तरफ प्रशासनिक दबाव.
प्रत्याशियों की स्थिति और राजनीतिक समीकरण
इस चुनाव में मुख्य टक्कर भाजपा समर्थित उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी और समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे डॉ. संजयन त्रिपाठी के बीच मानी जा रही है. लंबे समय से इस सीट पर प्रभाव रखने वाले ध्रुव कुमार त्रिपाठी को इस बार भाजपा का समर्थन प्राप्त है जिससे पार्टी का संगठनात्मक ढांचा उनके साथ खड़ा नजर आ रहा है.
सपा का दांव: टिकट न मिलने से नाराज होकर भाजपा से अलग हुए डॉ. संजयन त्रिपाठी ने सपा का दामन थामकर मुकाबले को कड़ा कर दिया है. वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अन्य निर्दल प्रत्याशी भी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं.
मतदान के दौरान छिटपुट विरोध और प्रशासनिक मुस्तैदी
चुनाव के दौरान कुछ बूथों (जैसे डीएवी कॉलेज) पर राजनीतिक समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और विरोध प्रदर्शन की घटनाएं भी सामने आईं क्योंकि यह प्रबुद्ध वर्ग और शिक्षकों का चुनाव है जिसमें राजनीतिक दलों की सक्रियता पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. हालांकि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी के चलते स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया और मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ी.
