क्या ढह जाएगा अंसारी परिवार का दो दशक पुराना मऊ किला या अब्बास बचा लेंगे विरासत, जनता किसके साथ?
मऊ सदर विधानसभा की सियासत: क्या दो दशकों से जारी अंसारी परिवार का तिलिस्म टूटेगा? जानें मुस्लिम-दलित समीकरण, भाजपा-सुभापा की रणनीति और अब्बास अंसारी की सियासी पकड़ का पूरा विश्लेषण.
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मऊ सदर विधानसभा सीट पिछले दो दशकों से अंसारी परिवार का अभेद्य किला बनी हुई है. मुख्तार अंसारी के बाद अब उनके बेटे अब्बास अंसारी इस विरासत को संभाल रहे हैं. इस क्षेत्र की राजनीति मुख्य रूप से दलित और मुस्लिम मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका अटूट समर्थन इस परिवार को मिलता रहा है. विपक्षी दलों की तमाम कोशिशों और सत्ता परिवर्तन के बावजूद, अंसारी परिवार के प्रभाव को कम करना अब तक किसी भी दल के लिए आसान साबित नहीं हुआ है.