बागी विधायकों की सपा में वापसी की क्या है सच्चाई? अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह ने दिया करारा जवाब
UP Politics Latest News: क्या क्रॉस वोटिंग करने वाले बागी विधायक फिर से अखिलेश यादव के पास जा रहे हैं? अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह के बयानों ने तस्वीर साफ कर दी है. साथ ही देखिए शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद केस में नया मोड़.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों को लेकर सरगर्मी तेज है. यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में कुमार अभिषेक ने इन मुद्दों का गहराई से विश्लेषण किया है. आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर चर्चा है कि जिन 7 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, वे अब समाजवादी पार्टी में वापसी की राह तलाश रहे हैं. इनमें मनोज पांडे, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, विनोद चतुर्वेदी, पूजा पाल, आशुतोष मौर्या और राकेश पांडे के नाम शामिल थे.
अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह का रुख: इन विधायकों ने वापसी की खबरों का पूरी तरह खंडन किया है. अभय सिंह ने कहा कि उन्हें प्रभु श्री राम मिल गए हैं, माया की जरूरत नहीं है. उन्होंने भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी. राकेश प्रताप सिंह ने भी साफ किया कि सपा को उन्हें वापस लाने का भ्रम छोड़ देना चाहिए और वे राम विरोधियों के साथ कभी नहीं जाएंगे. आपको बता दें कि चर्चा है कि राकेश प्रताप सिंह के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़ने वाले चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी अखिलेश यादव के संपर्क में हैं और सपा उन्हें टिकट दे सकती है.
उधर शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के केस में मचा है बवाल
शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे पॉक्सो (POCSO) और अन्य घृणित आरोपों को साजिश बताया है. उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय किसी ऐसे राज्य की पुलिस जांच करे जहां भाजपा की सरकार न हो. समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने वाराणसी पहुंचा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी अपना समर्थन पत्र भेजा है. विपक्ष का मानना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है. शंकराचार्य के शिष्यों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी साजिश जगतगुरु रामभद्राचार्य के इशारे पर रची गई है.
वहीं रामभद्राचार्य के शिष्यों ने अखिलेश यादव को "नमाजवादी" कहकर पलटवार किया है. आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने बयान दिया था कि उनसे गलती हुई कि उन्होंने पहले रामभद्राचार्य को जेल नहीं भेजा. इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच वैचारिक युद्ध और तेज हो गया है.










