स्वामी प्रसाद मौर्य की इंडिया गठबंधन में एंट्री मुश्किल, अखिलेश यादव ने लगाई 'नो एंट्री', क्या कांग्रेस खड़ी रहेगी साथ?
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स्वामी प्रसाद मौर्य इंडिया गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ उनकी तल्खी लगातार बढ़ रही है. मौर्य कांग्रेस नेताओं से मुलाकात का हवाला देकर गठबंधन में जगह मिलने की उम्मीद जता रहे हैं.
अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य इन दिनों इंडिया गठबंधन में शामिल होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. रामलीला मैदान में हुई इंडिया ब्लॉक की रैली में मौर्य ने भले ही सीधे शिरकत न की हो, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों को झंडों और बैनरों के साथ वहां जरूर भेजा. एक तरफ मौर्य कांग्रेस के बड़े नेताओं से अपनी मुलाकातों का हवाला देकर गठबंधन में एंट्री की उम्मीद जता रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ, वह लगातार समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखे जुबानी हमले कर रहे हैं. अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनके गठबंधन में स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए कोई जगह नहीं है. अब सवाल यह उठ रहा है कि अखिलेश से इतनी तल्खी और बयानबाजी के बाद क्या कांग्रेस सच में मौर्य को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बना पाएगी?
अखिलेश यादव पर मौर्य के तीखे हमले
अखिलेश यादव के 'नो एंट्री' वाले बयान के बाद से स्वामी प्रसाद मौर्य बिफरे हुए हैं. वह लगातार अखिलेश को टारगेट करते हुए उन पर तंज कस रहे हैं. मौर्य ने कहा कि जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद कंफ्यूज हो, जो कभी पीडीए (PDA) में 'डी' का मतलब दलित बताता हो और कभी 'डी' का मतलब डिंपल यादव, वह व्यक्ति अपनी पार्टी और प्रदेश को क्या दिशा दिखाएगा? उनका यह भी मानना है कि इंडिया गठबंधन में असली फैसला कांग्रेस पार्टी करेगी, अखिलेश यादव नहीं.
क्या कांग्रेस मोल लेगी अखिलेश की नाराजगी?
सियासी जानकारों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य शायद इस गलतफहमी में हैं कि यूपी में कांग्रेस ही सीटों का बंटवारा तय करेगी. जबकि असल में सपा और कांग्रेस को आपस में सीटें तय करनी हैं. ऐसे में अगर अखिलेश यादव ने मौर्य की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी, तो कांग्रेस के लिए उन्हें गठबंधन में लाना मुश्किल हो जाएगा. चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य अब इतने बड़े नेता भी नहीं हैं कि कांग्रेस उनके लिए अखिलेश यादव को नाराज करके पूरे गठबंधन को दांव पर लगा दे. उनके लगातार हो रहे बयानों से सपा और कांग्रेस के बीच भी दरार (रार) पैदा हो सकती है.
समर्थकों ने भी मौर्य से किया किनारा
गठबंधन में एंट्री की जद्दोजहद के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य को अपनी पार्टी के अंदर भी झटके लग रहे हैं. उनके कई कट्टर समर्थक अब उनका साथ छोड़ते नजर आ रहे हैं. इनमें एक बड़ा नाम बृजेश प्रजापति का है, जो बसपा, बीजेपी और सपा के सफर में हमेशा मौर्य के साथ खड़े रहे. लेकिन अब वह भी मौर्य के खिलाफ हो गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रजापति ने यहां तक कह दिया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब बीजेपी के एजेंट और जासूस बन चुके हैं. ऐसे हालातों में मौर्य के लिए राजनीतिक डगर काफी मुश्किल होती दिखाई दे रही है.
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