रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही संभल की जामा मस्जिद के लिए आ गई ये वाली डिमांड
Sambhal Jama Masjid Controversy: संभल की जामा मस्जिद में रमजान के मौके पर रंगाई-पुताई को लेकर एएसआई से अनुमति मांगी गई है. विवादित स्थल होने के कारण पिछली बार मामला हाईकोर्ट पहुँचा था. देखिए संभल से यह ग्राउंड रिपोर्ट.

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उत्तर प्रदेश के संभल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावट की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. एएसआई (ASI) संरक्षित इस विवादित स्थल को लेकर मस्जिद कमेटी ने प्रशासन से अनुमति मांगी है. रमजान का महीना शुरू होने के साथ ही जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने एएसआई मेरठ सर्किल के सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट को पत्र लिखा है.
पत्र में मांग की गई है कि गत वर्ष की भांति इस बार भी रमजान के दौरान मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावट का काम एएसआई की देखरेख में कराया जाए. तर्क दिया गया है कि बरसात और धूल-मिट्टी के कारण दीवारों का रंग फीका पड़ गया है, जिससे मस्जिद की भव्यता प्रभावित हो रही है.
पिछले साल (2025) भी एएसआई ने शुरू में अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद 16 मार्च 2025 से एएसआई की निगरानी में सजावट का काम शुरू हुआ था. इस बार भी कमेटी ने समय रहते काम शुरू करने की अपील की है.
क्या है इस मस्जिद से जुड़ा विवाद?
संभल की यह जामा मस्जिद एएसआई संरक्षित है और हिंदू पक्ष यहां हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए कोर्ट में वाद दायर कर चुका है. 24 नवंबर 2024 को एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान संभल में भारी हिंसा भड़की थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी. मस्जिद के सदर जफर अली इस हिंसा के मामले में जेल भी जा चुके हैं और वर्तमान में यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है.










