विकसित उत्तर प्रदेश: कैसे बना यूपी देश की कृषि महाशक्ति? जानें 2047 का विजन और योगी सरकार की नीतियां
Agriculture Growth Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश अब केवल अनाज नहीं उगा रहा, बल्कि विकसित भारत का सपना सच कर रहा है. गेहूं, चावल और गन्ना उत्पादन में नंबर 1 यूपी का 2047 तक वैश्विक लीडर बनने का क्या है प्लान? देखिए पूरी रिपोर्ट.

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उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और अब यह राज्य देश के 'ग्रोथ इंजन' के रूप में उभर रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में खेती अब केवल गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि एक आर्थिक महाशक्ति बन चुकी है. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के पास देश की कुल कृषि योग्य भूमि का मात्र 11% है, लेकिन यहां का किसान देश का 21% खाद्यान्न पैदा कर रहा है. गेहूं उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी 30.5% से बढ़कर 35.3% हो गई है, वहीं चावल उत्पादन में यह 12.5% से बढ़कर 14.4% हो गई है. दोनों ही फसलों में यूपी देश में नंबर वन है.
दालों के उत्पादन में हिस्सेदारी 9.1% से बढ़कर 14.1% और तिलहन में 3.3% से बढ़कर 6.9% हो गई है.
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत यूपी के किसानों के खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से 95,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है. किसानों को अब प्राकृतिक खेती, ड्रोन तकनीक और एआई (AI) टूल्स के बारे में उनकी अपनी भाषा में जानकारी दी जा रही है. गन्ना भुगतान की बात करें तो डिजिटल पर्ची व्यवस्था और पारदर्शिता के कारण बिचौलियों का वर्चस्व खत्म हुआ है.
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भविष्य का रोडमैप: 2030 और 2047 के लक्ष्य
2030 तक का लक्ष्य: फसल उत्पादकता और कृषि निर्यात में भारत में रैंक वन बनना.
2047 तक का लक्ष्य: वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और यूरोप के कृषि मॉडल को टक्कर देना और रूस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के बराबर निर्यात क्षमता विकसित करना.
पशुधन और मत्स्य पालन (सफेद और नीली क्रांति)
दूध उत्पादन: 2030 तक देश में नंबर वन बने रहना और 2047 तक दुनिया का लीडर बनना.
मछली पालन: 2030 तक देश के कुल उत्पादन में 15% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य है.










