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सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने प्रोफेसर नेहा सिंह से भी तगड़े दावे कर दिए

Galgotias University Controversy: एआई समिट में चीन के रोबोट को अपना बताने के आरोप पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सफाई दी है. देखिए 'थर्माकोल प्लेन' और ट्रोलिंग पर क्या बोले छात्र और क्या है असली कहानी.

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ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी इस समय सोशल मीडिया पर जबरदस्त ट्रोलिंग का सामना कर रही है. विवाद की शुरुआत दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट से हुई. इसमें यूनिवर्सिटी की ओर से पेश किए गए इनोवेशंस को लेकर सवाल उठे. समिट में एक रोबोट प्रदर्शित किया गया था, जिसे सोशल मीडिया पर 'चीन का प्रोडक्ट' बताकर ट्रोल किया गया. इस बीच गलगोटियो यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने दावा किया है कि यह एक मिसकम्युनिकेशन था. 

छात्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोट उन्होंने बनाया है. उस पर मूल कंपनी की ब्रांडिंग मौजूद थी. उसे केवल छात्रों को प्रेरित करने के लिए वहां लाया गया था. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 'थर्माकोल प्लेन' के बारे में छात्रों ने बताया कि वह केवल एक शोकेस मॉडल था. उन्होंने दावा किया कि उनके पास असली रिमोट कंट्रोल प्लेन है जो उड़ता है, लेकिन सुरक्षा कारणों से समिट में केवल उसका प्रोटोटाइप मॉडल रखा गया था.

छात्रों ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया कि उन्हें समिट से बाहर निकाल दिया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने उन्हें केवल कुछ समय के लिए बैरिकेड्स के पीछे हटने और अगले अपडेट का इंतज़ार करने को कहा था, न कि वहां से जाने को. छात्रों ने यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों का बचाव करते हुए 'सखी ऐप' का जिक्र किया, जो महिलाओं की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए बनाया गया है. 

उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में टेक-फेस्ट होते रहते हैं और शार्क टैंक के आर्टिस्ट्स सहित रेडबुल जैसी बड़ी कंपनियां भी यहां आती हैं.  छात्रों ने सोशल मीडिया पर बन रहे मीम्स और अपनी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई. उनका कहना है कि इससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और उनके परिवार भी परेशान हैं. 

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