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बिना देखभाल कभी घर से नहीं निकले... कहानी आशीष की जिन्होंने पूरी जवानी बड़े भाई हरीश राणा की सेवा में कर दी थी न्योछावर

13 साल के कोमा के बाद हरीश राणा को मिली गरिमामयी विदाई. भाई आशीष के अटूट समर्पण और सुप्रीम कोर्ट के इच्छा मृत्यु के आदेश की पूरी कहानी.

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एक दशक से ज्यादा का समय, एक ही बिस्तर और एक ही छत के नीचे अपनों की उम्मीदें. यह कहानी हरीश राणा की है, जिनका 13 साल लंबा संघर्ष आखिरकार समाप्त हो गया. दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित मोक्ष धाम में जब हरीश को अंतिम विदाई दी गई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. यह विदाई केवल एक अंत नहीं, बल्कि एक भाई के उस त्याग की परिकाष्ठा थी जिसने अपनी पूरी जवानी अपने बड़े भाई की सेवा में झोंक दी.