स्क्रब टायफस, लेप्टोस्पायरोसिस, हेमरोजेनिक डेंगू: UP में फैले बुखार के इन 3 नामों को जानें

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उत्तर प्रदेश के कई जिले इस समय जानलेवा बुखार की चपेट में हैं. खासकर फिरोजाबाद जहां डेंगू के एक खतरनाक प्रकार समेत दूसरी वेक्टर बोर्न बीमारियों की चपेट में आकर अबतक आधिकारिक तौर पर 51 मौतें हो चुकी हैं. इसी तरह मथुरा में 13 मौत हुई हैं. दोनों जगहों पर मृतकों में बड़ी संख्या बच्चों की है. इन दोनों जिलों समेत यूपी के कई जिलों में इस वक्त वेक्टर जनित बीमारियां फैली हुई हैं. तमाम मरीजों की जांच के बाद फिरोजाबाद प्रशासन ने जहां डेंगू के एक खतरनाक प्रकार हेमरोजेनिक डेंगू को अलग से पॉइंट आउट किया, वहीं मथुरा प्रशासन ने स्क्रब टायफस और लेप्टोस्पायरोसिस का भी नाम लिया. आइए जानते हैं इन तीन बीमारियों, इनकी वजहों और इनसे बचाव के उपायों को.

पहले जानिए कि वेक्टर जनित बीमारियां क्या होती हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनियाभर की संक्रामक बीमारियों में वेक्टर जनित बीमारियों की हिस्सेदारी 17 फीसदी से अधिक है. इससे सालाना 7 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है. ये परजीवी, बैक्टीरिया या वायरस, किसी भी वजह से हो सकती हैं. इनमें प्रमुख रूप से डेंगू शामिल है, जो एडीज मच्छर के काटने की वजह से फैलता है. वेक्टर जनित अन्य बीमारियों में चिकनगुनिया बुखार, जीका वायरस बुखार, पीला बुखार, वेस्ट नाइल बुखार, जापानी एन्सेफलाइटिस (सभी मच्छरों के काटने से) और टिक-जनित एन्सेफलाइटिस (टिक: खून चूसने वाला एक कीट) शामिल हैं. वेक्टर उन जीवों को कहा जाता है, जो मनुष्यों के बीच या जानवरों से मनुष्यों के बीच संक्रामक रोग का प्रसार कर सकते हैं. इनमें अधिकतर खून चूसने वाले जीव होते हैं, जैसे मच्छर. इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक कर WHO की वेबसाइट पर मौजूद रिपोर्ट को पढ़ा जा सकता है.

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क्या है हेमरोजेनिक डेंगू: हम सभी जानते हैं कि डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. डेंगू के कुछ मरीजों में इसका खतरनाक प्रकार हेमरोजेनिक डेंगू भी देखने को मिल सकता है. फिरोजाबाद के जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने WHO की टीम के हवाले से स्थानीय केसों में हेमरोजेनिक डेंगू की पुष्टि करते हुए बताया कि ऐसे मामलों में बुखार के साथ प्लेटलेट्स अचानक से घट जाती हैं. मसूढ़ों से खून निकलता है.

अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक इसके लक्षणों में पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी होना, अचानक से शरीर के तापमान में बदलाव (कभी तेज बुखार, कभी ठंड), रक्तस्राव और मानसिक भ्रम जैसी बातें भी शामिल हैं. सीडीसी की वेबसाइट पर मौजूद रिपोर्ट को यहां क्लिक कर इस बारे में विस्तार से पढ़ा जा सकता है.

क्या है स्क्रब टायफस: सीडीसी के मुताबिक स्क्रब टाइफस, जिसे बुश टाइफस के नाम से भी जाना जाता है, ‘ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी’ नामक बैक्टीरिया के कारण होती है. यह संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से लोगों में फैलता है। इन संक्रमित चिगर्स को फसल के कीड़ों (हार्वेस्ट बग, रेड बग) के रूप में भी जाना जाता है. इस संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति में बुखार, सिर दर्द, शरीर दर्द और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. इस बारे में यहां क्लिक कर विस्तार से पढ़ा जा सकता है.

क्या है लेप्टोस्पायरोसिस: मथुरा डीएम ने वहां के स्थानीय मामलों में लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का भी जिक्र किया है. सीडीसी के मुताबिक लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरिया जनित रोग है, जो मनुष्यों और जानवरों को प्रभावित करता है. यह जीनस लेप्टोस्पाइरा के बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह संक्रमित पशुओं के पेशाब से फैलता है. पशुओं का संक्रमित पेशाब से यह पानी या मिट्टी में मिलकर हफ्तों, महीनों तक जीवित रहता है. सुअर, घोड़े, कुत्ते, मवेशी, जैसे जानवर इसके वाहक बन सकते हैं. इससे संक्रमित शख्स में तेज बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, उल्टी, पीलिया, पेट दर्द और डायरिया जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. इस बारे में ज्यादा जानकारी यहां क्लिक कर हासिल की जा सकती है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट : यूपी तक ने इन तीनों बीमारियों और वेक्टर जनित बीमारियों के संदर्भ में राम सागर मिश्र कंबाइंड अस्पताल, लखनऊ के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉक्टर सुमित से बात की. डॉक्टर सुमित ने बताया कि इन बीमारियों से बचाव का एकमात्र उपाय है साफ-सफाई से रहना. उनका कहना है कि अपने आसपास पानी न जमा होने दें. नाले-नालियों में पानी के बहाव का इंतजाम दुरुस्त रखें. पशु जहां रहते हों वहां सफाई रखें. मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. प्रकाश और हवादार वातावरण में रहें. इन तरीकों और लक्षण दिखने पर समय रहते इलाज को अपनाकर इन बीमारियों को जानलेवा होने से रोका जा सकता है.

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