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IPL हीरो रिंकू के पास कभी नहीं थे जूते तक खरीदने के पैसे, झाड़ू-पोछा तक किया, अब बदली किस्मत

अकरम खान

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Indian Premier League (IPL) यानी आईपीएल में बीती रात अलीगढ़ के रिंकू सिंह ने इतिहास रच दिया. रिंकू सिंह ने यश दयाल के ओवर में एक के बाद एक लगातार 5 छक्के मार डाले और अपनी टीम केकेआर को यादगार जीत दिला दी. पूरे देश में रिंकू सिंह चर्चा का विषय बने हुए हैं. रिंकू यूपी के अलीगढ़ के रहने वाले हैं. अलीगढ़ से निकलकर आईपीएल में जगह बनाना और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना रिंकू के लिए आसानी नहीं था. कदम-कदम पर रिंकू को भारी चुनौतियां का सामना करना पड़ा.

नहीं थे जूते और क्रिकेट किट खरीदने के तक पैसे

रिंकू सिंह के परिवार की आर्थिक हालत काफी कमजोर थी. रिंकू के पिता घरों में गैस सिलेंडर बांटने का काम करते हैं. पिता आज भी घरों में सिलेंडर बांटने का काम करते हैं.  रिंकू का बड़ा भाई ऑटो चलाकर परिवार का गुजारा करता है. पूरा परिवार गैस गोदाम के एक छोटे से घर में ही रहता है.

रिंकू के पिता का कहना है कि उनकी आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि वह रिंकू को क्रिकेट किट या क्रिकेट के जूते तक दिला पाते. रिंकू के पिता का कहना है कि उन्होंने हमेशा रिंकू को क्रिकेट खेलने से रोका, क्योंकि परिवार की आर्थिक हालत काफी खराब थी. मगर रिंकू ने क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा. क्रिकेट के साथ रिंकू परिवार की जिम्मेदारियां भी संभालता गया.

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देश की तरफ से खेले रिंकू

रिंकू के पिता ने कहा कि अब उनका सपना है कि बेटा भारतीय टीम की तरफ से खेले. हम बेटे की सफलता को देखकर बहुत खुश हैं. मुझें हमेशा सुनने को मिलता था कि आपका बेटा अच्छा खेलता है, इसपर ध्यान दीजिए, लेकिन मैं रिंकू की कोई खास मदद नहीं कर पाया. मेरे पास पैसे नहीं थे कि मैं रिंकू को क्रिकेट का सामान, क्रिकेट का बैट दिलवा सकूं. मैंने रिंकू की कोई मदद नहीं की मगर उसने हमेशा मेरी मदद की.

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पिता का कहना है कि एक समय था जब रिंकू मेरे साथ सिंरेडर बांटने का काम करता था. फिर एक जगह रिंकू ने झाजू पोखा लगाने का काम भी किया. मगर उसने अपने क्रिकेट को कभी नहीं छोड़ा.

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कोच ने क्या कहा

रिंकू सिंह के कोच मसूद उल जफर का कहना है कि रिंकू जैसे क्रिकेट खेलता है उसे देखकर मुझें हमेशा लगता था कि वह हर हालात में अच्छी बल्लेबाजी कर सकता है. कल के मैच में भी मुझें उम्मीद थी कि रिंकू अपनी टीम को जीत दिलाएगा. उसके जज्बे और ताकत को मैं जानता हूं.

कोच मसूद ने बताया कि जब पहली बार मैं रिंकू से मिला था तब उसकी घर की माली हालत ठीक नहीं थी. मगर रिंकू के अंदर काफी प्रतिभा थी. आज कल के बच्चों को रिंकू से काफी कुछ सिखने की जरूरत है.

 

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