शादी के वादे पर 4 साल तक बने शारीरिक संबंध फिर मुकरा शख्स तो क्या ये रेप? महिला लेखपाल के केस में गजब का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के वादे पर चार साल तक प्रेम संबंध और बाद में शादी से इंकार के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि ऐसा मामला दुष्कर्म (रेप) नहीं माना जाएगा. अदालत ने महिला लेखपाल की याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि आपसी सहमति से बने रिश्ते में केवल शादी से इनकार को रेप का स्वरूप नहीं दिया जा सकता.
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादी के वादे के नाम पर शारीरिक संबंध बनाने और फिर बाद में शादी से मुकर जाने के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर दो एडल्ट आपसी सहमति से चार साल तक प्रेम संबंध में रहे और इस दौरान शारीरिक रिश्ते बनाए गए और बाद में एक पक्ष शादी से इंकार कर देता है, तो यह दुष्कर्म (रेप) की श्रेणी में नहीं आता. अदालत ने एक महिला लेखपाल की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.









