यूपी के 5 जिलों में सरकार लगाएगी ये स्पेशल अलार्म, नाम हो गए फाइनल... सोनभद्र के 32 गांवों में भी खास इंतजाम
उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को रोकने के लिए पांच जिलों में लाइटनिंग डिटेक्शन सेंसर लगाए जा रहे हैं. एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र में लगने वाले ये सेंसर बिजली गिरने की गतिविधियों का पता लगाकर समय रहते चेतावनी देने में मदद करेंगे.
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उत्तर प्रदेश में बारिश के दौरान खेतों में काम करने वाले किसानों, खुले में मजदूरी करने वाले लोगों और पशुपालकों को आकाशीय बिजली से बचाने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है.
प्रदेश के पांच जिलों में ऐसे सेंसर लगाए जा रहे हैं, जो बिजली गिरने की गतिविधियों का तेजी से पता लगाकर समय रहते चेतावनी देने में मदद करेंगे. इससे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचने का समय मिल सकेगा और प्रशासन भी जरूरी कदम उठा सकेगा.
राज्य सरकार भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के सहयोग से ये पहल कर रही है. सरकार का उद्देश्य आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को कम करना और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी को मजबूत करना है.
यूपी के किन पांच जिलों में लगेंगे सेंसर?
सरकारी बयान के मुताबिक, बिजली गिरने की गतिविधियों का पता लगाने वाले सेंसर प्रदेश के पांच जिलों में लगाए जा रहे हैं. इनमें एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र शामिल हैं.
इन सेंसर से बिजली गिरने की गतिविधियों का जल्द पता लगाने और समय पर चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी. अलर्ट मिलने पर लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकेंगे. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें भी संभावित खतरे को देखते हुए जरूरी कदम उठा सकेंगी.
सोनभद्र के 32 गांवों में 1.33 करोड़ रुपये से लगेगा सिस्टम
सोनभद्र में बिजली गिरने से लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं. जिले के दुद्धी ब्लॉक के 32 गांवों में 'लाइटनिंग डिटेक्शन एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम' लगाया जा रहा है. इस परियोजना पर 1.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
इस सिस्टम का उद्देश्य उन इलाकों में रहने वाले लोगों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना है, जहां आकाशीय बिजली गिरने का खतरा रहता है. अलर्ट मिलने से लोगों को सुरक्षित जगह जाने और जरूरी सावधानी बरतने का मौका मिल सकेगा.
किसानों और खुले में काम करने वालों को होगा फायदा
बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली का खतरा खास तौर पर उन लोगों के लिए रहता है, जो खुले मैदानों में काम करते हैं. खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर, ग्रामीण और पशुपालक इसकी चपेट में आ सकते हैं.
समय पर चेतावनी मिलने से ये लोग खेतों या खुले स्थानों से हटकर सुरक्षित जगह पहुंच सकते हैं. प्रशासन भी संभावित खतरे को देखते हुए लोगों को सतर्क करने और बचाव के जरूरी उपाय करने में इसका इस्तेमाल कर सकेगा.
हादसे के बाद राहत ही नहीं, पहले से बचाव पर जोर
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, राज्य की आपदा प्रबंधन रणनीति का उद्देश्य सिर्फ हादसे के बाद राहत पहुंचाना नहीं है, बल्कि संभावित खतरे की पहले से पहचान कर नुकसान को रोकना भी है.
बिजली गिरने की चेतावनी देने वाले सेंसर और शुरुआती अलर्ट सिस्टम से मौसम पर नजर रखने की क्षमता बेहतर होगी. सरकार को उम्मीद है कि तकनीक की मदद से प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी मजबूत होगी और आकाशीय बिजली से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी.
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