Koraon Assembly Seat 2027:प्रयागराज की कोरांव विधानसभा सीट जो आदिवासी समाज के लिए सुरक्षित है. आगामी 2027 के चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण रणक्षेत्र बनती जा रही है. वर्तमान में यहां से भाजपा के राजमणि कोल विधायक हैं जो लगातार दो बार (2017 और 2022) जीत दर्ज कर चुके हैं. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के रामदेव निडर का मानना है कि यदि पिछले चुनाव में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर अखिलेश यादव ने उनके लिए प्रचार किया होता तो परिणाम कुछ और होते. क्या 2027 में अखिलेश यादव अपने स्थानीय नेताओं की मांग पर ध्यान देंगे और क्या भाजपा अपनी जीत की हैट्रिक बरकरार रख पाएगी?
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भाजपा का 'मजदूर से विधायक' तक का सफर और जीत का फॉर्मूला
मौजूदा विधायक राजमणि कोल का परिवार कभी मजदूर संघ से जुड़ा था. राजमणि अपनी जीत का श्रेय घर-घर जाकर लोगों से मिलने और उनके सुख-दुख में शामिल होने को देते हैं. उनका दावा है कि 2017 का इतिहास 2027 में भी दोहराया जाएगा और भाजपा यहाँ से किसी भी कीमत पर नहीं हारेगी.
सपा प्रत्याशी का मलाल: "अखिलेश भैया आ जाते तो जीत जाता"
सपा नेता रामदेव निडर का कहना है कि 2022 में उन्हें टिकट की घोषणा का पहले से पता नहीं था. फिर भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी. उनका मानना है कि बैलेट पेपर के वोटों में वे आगे थे. लेकिन ईवीएम के परिणामों ने बाजी पलट दी. रामदेव को सबसे बड़ा मलाल यह है कि उनके प्रचार के लिए कोई बड़ा नेता नहीं आया. उन्हें उम्मीद है कि 2027 में अखिलेश यादव स्वयं मैदान में उतरेंगे.
कोरांव का जातीय समीकरण: कोल वोटर्स हैं किंगमेकर
कोरांव सीट पर जीत-हार का फैसला काफी हद तक आदिवासी समाज, विशेषकर कोल समुदाय के हाथों में होता है। एक अनुमान के मुताबिक यहां:
कोल वोटर: 80,000
ब्राह्मण: 70,000
कुर्मी: 40,000
दलित: 35,000
कुशवाहा: 30,000
भाजपा के पास यहां अपना कोर सवर्ण और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक है, जबकि सपा अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए सेंध लगाने की कोशिश कर रही है.
सरकारी योजनाओं का प्रभाव
स्थानीय पत्रकारों का विश्लेषण है कि कोरांव जैसे गरीब और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं (राशन, आवास, खाद्यान्न) का गहरा असर है. कोरोना काल के दौरान मिली मदद और वर्तमान कानून-व्यवस्था भाजपा के पक्ष में एक मजबूत माहौल बनाती है. हालांकि सपा अब 'छोटेलाल खरवार' जैसे आदिवासी चेहरों को आगे बढ़ाकर इस वोट बैंक में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है.
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