उत्तर प्रदेश की सियासत में 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने का दावा करने वाले ओम प्रकाश राजभर ने आजमगढ़ की अतरौलिया सीट को अपना नया रणक्षेत्र चुना है. दशकों से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाली इस सीट पर राजभर खुद मोर्चा संभाल रहे हैं, जिससे यह मुकाबला अब 'हाई-प्रोफाइल' हो गया है. राजभर लगातार क्षेत्र के दौरे कर रहे हैं और अपने समाज के साथ-साथ अन्य पिछड़े वर्गों को साधने में जुटे हैं.
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सपा के गढ़ में 'सेंधमारी' की तैयारी
अतरौलिया सीट पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी की मजबूत पकड़ वाली मानी जाती है, जहां संग्राम यादव जैसे नेताओं का वर्चस्व रहा है. हालांकि, ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी से यहां के राजभर वोट बैंक में बड़े बिखराव की संभावना है. अगर राजभर वोट सुभासपा की ओर शिफ्ट होते हैं, तो यह सपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है.
अनिल राजभर बनाम ओम प्रकाश, अपनों के बीच वर्चस्व की जंग
इस चुनाव की सबसे रोचक बात राजभर समुदाय के दो बड़े नेताओं का टकराव है. एक तरफ भाजपा के कद्दावर नेता और मंत्री अनिल राजभर अपनी जमीन मजबूत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ओम प्रकाश राजभर अपनी अलग रणनीति से मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि जातिगत राजनीति के इस खेल में जनता किस 'राजभर' चेहरे पर भरोसा जताती है.
स्थानीय मुद्दे और गठबंधन का गणित
सिर्फ जाति ही नहीं, बल्कि विकास के मुद्दे और दलों के बीच होने वाले गठबंधन भी अतरौलिया की दिशा तय करेंगे. भाजपा और उसके सहयोगियों की रणनीति यहाँ सपा के वोट बैंक को काटने की है. पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर की एंट्री ने चुनाव को एकतरफा होने से रोक दिया है और अब जीत-हार का अंतर बहुत कम रहने वाला है.
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