भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह के राजनीति में कदम रखने की अटकलें उस वक्त तेज हो गई जब उन्होंने नोएडा से चुनाव लड़ने के सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दी. शालिनी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित मन तो नहीं बनाया है, लेकिन उन्होंने इस संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया है. उन्होंने कहा कि अगर वैसी परिस्थितियां बनीं, तो वह पीछे नहीं हटेंगी. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या प्रतीक और करण भूषण के बाद अब परिवार का तीसरा सदस्य भी चुनावी मैदान में उतरेगा.
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परिवारवाद के आरोपों पर बेबाक जवाब और शैक्षणिक दबदबा
राजनीति में परिवारवाद के आरोपों पर शालिनी सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है. उनका मानना है कि अगर किसी व्यक्ति में काबिलियत और शिक्षा है, तो एक परिवार से चार लोग भी चुनाव लड़ सकते हैं. शालिनी खुद दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी की अध्यक्ष रह चुकी हैं और उन्होंने यह चुनाव अपने दम पर जीता था. राजनीति के अलावा वह एक सफल उद्यमी भी हैं. वह तपु एजुकेशनल सोसाइटी की अध्यक्ष और इंदिरापुरम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन की चेयरमैन हैं. गाजियाबाद, पटना, एनसीआर और अयोध्या में उनके नेतृत्व में लगभग छह स्कूल और तीन कॉलेज संचालित हो रहे हैं.
निशानेबाज, कवयित्री और बाहुबली शब्द की नई व्याख्या
शालिनी सिंह की पहचान केवल एक राजनीतिक परिवार की बेटी के रूप में नहीं है. वह 10 मीटर एयर पिस्टल की नेशनल शूटर रही हैं और उन्हें घुड़सवारी व लैंड रोवर चलाने का शौक है. हाल ही में उनकी कविताओं की किताब 'बेबाक हूं बेदब नहीं' भी चर्चा में है. 'बाहुबली' शब्द पर अपना नजरिया साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में यह कोई नकारात्मक शब्द नहीं है. उनके अनुसार, जिसके पास बाहुबल नहीं होगा, वह किसी निर्बल की मदद कैसे कर पाएगा. शालिनी की शादी बिहार के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में विशाल सिंह से हुई है, जो विस्कोमान के चेयरमैन हैं.
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