UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान शुरू हो गई है. कांग्रेस पार्टी लगातार 150 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है और सीट शेयरिंग को लेकर दबाव बना रही है. इसी बीच, राज्यसभा चुनाव के नामांकन के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस की इस मांग पर एक बड़ा बयान देकर सियासी हलचल तेज कर दी है. अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में साफ कर दिया है कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा सिर्फ 'जिताऊ उम्मीदवार' के आधार पर ही होगा. इस बयान के बाद कांग्रेस के लिए चुनौती और बढ़ गई है. वहीं, चर्चा यह भी है कि गठबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए कांग्रेस यूपी में अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल सकती है.
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'जीत ही है गठबंधन और सीट का आधार'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब अखिलेश यादव से कांग्रेस की 150 सीटों की मांग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "जीत, जीत और जीत! जीत ही सीट का आधार है." अखिलेश यादव ने हालांकि सीधे तौर पर कांग्रेस का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि जो पार्टी गठबंधन में है, वही रहेगी. उनका संदेश स्पष्ट था कि अगर कांग्रेस 150 सीटें मांग रही है, तो उन्हें 150 ऐसे उम्मीदवार भी सामने लाने होंगे जो जीत दर्ज कर सकें. सपा का मानना है कि कांग्रेस के पास इतनी बड़ी संख्या में जिताऊ उम्मीदवार नहीं हैं.
कांग्रेस के सामने 'जिताऊ चेहरे' की चुनौती
सपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी कांग्रेस को इतनी बड़ी संख्या में सीटें देने के पक्ष में नहीं है. लोकसभा चुनाव में भी सपा ने कई सीटों पर कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. सपा का मानना है कि कई जिलों में कांग्रेस के पास न तो मजबूत संगठन है और न ही कार्यकर्ता. ऐसे में कांग्रेस 100 या 150 जिताऊ उम्मीदवार कहां से लाएगी? सपा किसी भी सूरत में इतनी बड़ी संख्या में सीटें दांव पर लगाने के लिए तैयार नहीं है, जब तक कि कांग्रेस की तरफ से कोई मजबूत और जीतने वाला चेहरा सामने न हो.
क्या कांग्रेस बदलेगी यूपी प्रदेश अध्यक्ष?
सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का रुख काफी सख्त माना जा रहा है. ऐसे में गठबंधन में किसी तरह की खटास न आए, इसके लिए चर्चा है कि कांग्रेस अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल सकती है. सियासी हलकों में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा (मोना मिश्रा) का नाम सबसे आगे चल रहा है. माना जाता है कि आराधना मिश्रा के संबंध मुलायम सिंह यादव के समय से ही सपा के साथ काफी अच्छे रहे हैं. अगर कांग्रेस उन्हें कमान सौंपती है, तो अखिलेश यादव के साथ बातचीत और सीट शेयरिंग का रास्ता काफी आसान हो सकता है. फिलहाल, अंतिम फैसला दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के बीच ही होना है.
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