अमेठी विकासखंड के कोहरा गांव से यूपी तक की यह विशेष रिपोर्ट आगामी पंचायत चुनाव 2026 को लेकर ग्रामीणों की राय और गांव के विकास की हकीकत को दर्शाती है. यह गांव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेठी के पूर्व सांसद रविंद्र प्रताप सिंह का गांव है, जिन्होंने 1977 में संजय गांधी को हराया था.
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गांव के कुछ पुरुषों और युवाओं का मानना है कि पिछले 5 वर्षों में काफी विकास हुआ है. सड़कों पर इंटरलॉकिंग, खरंजा, बिजली की व्यवस्था और घर-घर पानी की टोंटी जैसे काम हुए हैं. विकास के दावों के बीच कई ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने गंभीर शिकायतें की हैं. उनका कहना है कि उन्हें आज तक सरकारी आवास (कॉलोनी), शौचालय या पेंशन जैसी किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है.
बिजली का हाल और अधिकारियों की लापरवाही
ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. एक महिला ने बताया कि मीटर लगाने के नाम पर कर्मचारियों ने ₹1,000 की घूस ली और अब बिजली का बिल बहुत ज्यादा (₹1,000 से ₹1,400 तक) आ रहा है, जबकि पहले यह ₹250 के आसपास होता था. लोगों का कहना है कि गांव में कोई भी सरकारी अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनने या जांच करने नहीं आता है.
गांव के युवाओं ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया है. उनका आरोप है कि किसी भी छोटे-बड़े काम या नौकरी के लिए घूसखोरी चरम पर है. बिना पैसे दिए एक दस्तखत तक नहीं होता है. हालांकि, कुछ युवाओं ने 'युवा मंगल दल' के गठन और खेल के मैदान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की है.
आगामी पंचायत चुनाव में ग्रामीणों के लिए मुख्य मुद्दे सड़क (आरसीसी रोड), पानी की बेहतर निकासी, बेरोजगारी का समाधान और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी वितरण होंगे.
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