Aaj ka UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भविष्य की बड़ी तैयारी और अतीत के काले पन्नों को लेकर जबरदस्त हलचल है. 'आज का यूपी' के इस विशेष अंक में हम राज्य की उन तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं जो सीधे तौर पर प्रदेश की सत्ता, सियासत और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करती हैं.
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1. यूपी में सीटों का विस्तार: क्या 403 से 606 हो जाएंगे विधायक?
उत्तर प्रदेश की विधानसभा और लोकसभा सीटों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जमीन तैयार की जा रही है. 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन (Delimitation) बिल पर गहन चर्चा होने की संभावना है. परिसीमन लागू होने के बाद यूपी विधानसभा की सीटें 403 से बढ़कर 606 और लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 होने का अनुमान है.
महिला आरक्षण: 33% महिला आरक्षण लागू होने से राजनीति का चेहरा बदल जाएगा. हाल ही में सीएम योगी ने मजाकिया लहजे में रवि किशन की ओर इशारा करते हुए कहा था कि महिला आरक्षण के बाद दिग्गजों की सीटें भी महिला उम्मीदवारों के पास जा सकती हैं. हालांकि 2027 के चुनाव में 606 विधायकों का दिखना मुश्किल है क्योंकि परिसीमन एक लंबी प्रक्रिया है.लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव में यह बदलाव पूरी तरह लागू हो सकता है.
2. कांग्रेस सांसद का विवादित बयान: 'अंधभक्त' शब्द से गरमाई सियासत
सीतापुर से कांग्रेस सांसद राजेश राठौर का एक ताजा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने राज्य में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. एक प्रदर्शन के दौरान सांसद ने कुछ खास जातियों (पांडेय, मिश्रा, दीक्षित) को सीधे तौर पर 'बीजेपी का अंधभक्त' करार दे दिया.
सांसद राठौर ने कहा कि देश की जनता आज जो समस्याएं झेल रही है वह इन्हीं 'अंधभक्तों' के कारण है. ब्राह्मणों की नाराजगी और उनके प्रतिनिधित्व को लेकर यूपी में पहले से ही संवेदनशील माहौल है. ऐसे में कांग्रेस सांसद का यह बयान चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. सोशल मीडिया पर इस बयान की काफी आलोचना हो रही है.
3. अतीक अहमद का खौफ: जब रेलवे को इलाहाबाद से भागना पड़ा
माफिया अतीक अहमद के साम्राज्य का काला इतिहास आज भी लोगों को दहला देता है. एक दौर ऐसा था जब अतीक का आतंक केवल जमीनों तक सीमित नहीं था बल्कि उसने सरकारी विभागों को भी अपनी पनाह मांगने पर मजबूर कर दिया था.
अतीक अहमद रेलवे स्क्रैप (कबाड़) के ठेकों पर दबदबा रखता था.उसकी गुंडागर्दी इस कदर बढ़ी कि भारतीय रेलवे को सुरक्षा कारणों से अपना पूरा कबाड़ गोदाम और सेटअप इलाहाबाद (प्रयागराज) से झांसी शिफ्ट करना पड़ा था. जब स्क्रैप का काम घटा, तो अतीक ने 'लैंड माफिया' के रूप में अपनी पहचान बनाई. करोड़ों की कीमती जमीनों को डरा-धमका कर औने-पौने दामों में लिखवाना उसका पेशा बन गया था. इसी वर्चस्व की जंग और 'जमीन की भूख' ने राजू पाल हत्याकांड जैसे खौफनाक अपराधों को जन्म दिया.
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