समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री, बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य को एक दिलचस्प ऑफर दिया है. उन्होंने कहा कि 100 विधायक लाइए और मुख्यमंत्री बन जाइए. अखिलेश का यह बयान उस समय आया है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विदेश दौरे पर हैं. गोरखपुर (सीएम योगी का गृह जनपद) के लोगों ने इस बयान पर मिली-जुली लेकिन तीखी प्रतिक्रिया दी है.
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कुछ लोगों का मानना है कि अखिलेश यादव फूट डालो राज करो की नीति अपना रहे हैं. उनका कहना है कि जो अपने सगे चाचा शिवपाल यादव को कुर्सी पर नहीं बैठा सके, वे भाजपा के नेताओं को क्या मुख्यमंत्री बनाएंगे. कई लोगों ने इसे महज एक मजाक या 'पॉलिटिकल सटायर' करार दिया है. उनका तर्क है कि अखिलेश खुद 9 साल से सत्ता से बाहर हैं, इसलिए वे इस तरह के बयान देकर चर्चा में रहना चाहते हैं.
एक व्यक्ति ने इसकी तुलना सेल से करते हुए कहा कि जब ब्रांडेड कपड़े नहीं बिकते तो भारी डिस्काउंट दिया जाता है; वैसे ही समाजवादी पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए यह ऑफर दिया गया है.
भाजपा के भीतर 'छटपटाहट' की चर्चा
कुछ लोगों ने स्वीकार किया कि भाजपा के भीतर दोनों उपमुख्यमंत्रियों में कहीं न कहीं शीर्ष पद की 'चाहत' या 'छटपटाहट' हो सकती है. एक स्थानीय निवासी ने कहा कि जब मदारी कहीं जाता है, तो तमाशबीन तमाशा देखते हैं और अखिलेश ने इसी मौके का फायदा उठाकर यह दांव खेला है.
गोरखपुर की अधिकांश जनता सीएम योगी के नेतृत्व में अटूट विश्वास दिखा रही है. लोगों का दावा है कि 2027 ही नहीं, बल्कि 2032 में भी भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आएगी. समर्थकों का कहना है कि सीएम योगी ने जमीन पर संघर्ष किया है, इसलिए उन्हें हटाना नामुमकिन है.
एक व्यक्ति ने अखिलेश को ही ऑफर दे दिया कि वे अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर लें, तो भाजपा उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर सकती है. कुल मिलाकर, अखिलेश यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तो पैदा की है, लेकिन गोरखपुर की जमीन पर लोग इसे सीएम योगी के खिलाफ एक कमजोर राजनीतिक पैंतरा मान रहे हैं.
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