उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है. यूपी Tak के खास कार्यक्रम 'मूड क्या है' में चित्रकूट जिले के वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के साथ एक विस्तृत चर्चा की गई. इस चर्चा में चित्रकूट और मानिकपुर विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरण, जातिगत ताने-बाने, टिकट वितरण की संभावनाओं और जनता के मूड का गहराई से विश्लेषण किया गया.
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चित्रकूट जिले में कुल दो विधानसभा सीटें हैं:
चित्रकूट सदर विधानसभा सीट (236): वर्तमान में यहां समाजवादी पार्टी (SP) के अनिल प्रधान विधायक हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में पूर्व राज्य मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को हराया था.
मानिकपुर विधानसभा सीट (237): इस सीट पर एनडीए गठबंधन के तहत अपना दल (एस) का कब्जा है, जहां पिछले चुनाव में अविनाश चंद्रवेदी ने जीत दर्ज की थी.
सीट-दर-सीट राजनीतिक विश्लेषण
1.चित्रकूट सदर विधानसभा सीट: सपा का मजबूत बेस वोट और बदलाव की परंपरा
जातिगत समीकरण: इस सीट पर कुर्मी/पटेल और यादव मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मण वर्ग की बड़ी संख्या है. समाजवादी पार्टी का मजबूत बेस वोट और यादव-कुर्मी समीकरण की वजह से सपा पिछले तीन चुनावों से या तो जीत दर्ज करती रही है या रनर-अप रही है.
टिकट और बदलाव का इतिहास: चित्रकूट में यह परंपरा रही है कि पार्टियां अक्सर अपने मौजूदा विधायकों या उम्मीदवारों के टिकट बदलती रहती हैं. इस बार भी मौजूदा विधायक के कार्यकाल की समीक्षा और नए दावेदारों के आने से टिकट को लेकर खींचतान देखने को मिल सकती है.
2. मानिकपुर विधानसभा सीट: ब्राह्मण बहुल सीट और एनडीए-अपना दल की खींचतान
ऐतिहासिक समीकरण: मानिकपुर विधानसभा सीट को ब्राह्मण बहुल सीट माना जाता है जहां आजादी के बाद से समाजवादी पार्टी कभी जीत नहीं पाई है.
गठबंधन और आंतरिक घमासान: वर्तमान में यह सीट अपना दल (एस) के पास है. हाल ही में स्थानीय नेताओं (जैसे निवर्तमान विधायक आनंद शुक्ला और अन्य दावेदारों) के बीच श्रेय लेने और टिकट को लेकर चल रही रस्साकशी से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह की स्थिति बनी हुई है. यदि टिकट वितरण में फेरबदल हुआ तो इसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है.
मुख्य चुनावी मुद्दे
विकास और राष्ट्रीय मुद्दों पर भारी जातिगत समीकरण: पत्रकारों के पैनल के अनुसार, चित्रकूट में राष्ट्रीय मुद्दे (जैसे यूजीसी रोलबैक या अन्य राजनीतिक चर्चाएं) केवल बहस का हिस्सा बनते हैं.लेकिन मतदान के समय मतदाता पूरी तरह से जातिगत समीकरण और स्थानीय उम्मीदवारों की जाति पर ही अपना निर्णय लेते हैं.
बसपा का घटता जनाधार: बहुजन समाज पार्टी (BSP) का पारंपरिक वोट बैंक पिछले कुछ चुनावों में छिटककर भाजपा और सपा की तरफ शिफ्ट हुआ है, जिससे बसपा का प्रभाव इस क्षेत्र में कमजोर होता नजर आ रहा है.
सपा बनाम भाजपा की मुख्य टक्कर: आगामी 2027 के चुनाव में भी मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (एनडीए) के बीच ही कड़ा रहने की संभावना है.
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