उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों और जनता के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं. यूपी Tak के खास कार्यक्रम 'मूड क्या है' में संभल जिले के दिग्गज और अनुभवी पत्रकारों के साथ चर्चा की गई. इस चर्चा में संभल जिले की चारों विधानसभा सीटों-संभल, गुन्नौर, असमोली और चंदौसी के चुनावी समीकरणों, जातीय ताने-बाने, परिवारवाद की चर्चा और जमीन पर जनता के मूड का बारीकी से विश्लेषण किया गया.
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संभल जिले का मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य
संभल जनपद में कुल चार विधानसभा सीटें हैं. इनमें से संभल, गुन्नौर और असमोली सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) का कब्जा है जबकि चंदौसी सुरक्षित सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का परचम लहरा रहा है. वरिष्ठ पत्रकारों के पैनल ने इस बात पर चर्चा की कि 2027 के चुनाव में समीकरण कैसे बदल सकते हैं और कौन से मुद्दे निर्णायक साबित होंगे.
सीट-दर-सीट राजनीतिक विश्लेषण
1. गुन्नौर विधानसभा सीट: यादव बहुल गढ़ और कड़े मुकाबले के आसार
जातीय समीकरण: गुन्नौर एक ऐतिहासिक और यादव बहुल सीट है, जहां यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है. हालांकि गांवों स्तर पर यादवों में आपसी पार्टीबाजी और दो खेमे पहले से ही सक्रिय हैं.
पिछड़ा वर्ग और अन्य दल: 2017 में बीजेपी के अजीत कुमार राजू ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में वोट छिटकने और क्रॉस वोटिंग के कारण वे हार गए थे. इस बार कश्यप, मल्लाह और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता बीजेपी के पक्ष में एकजुट होकर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. इसके अलावा, डीपी यादव द्वारा प्रत्याशी उतारे जाने से यादव वोटों के डायवर्जन की संभावना पर भी चर्चा हुई.
2. संभल विधानसभा सीट: परिवारवाद की सुगबुगाहट और AIMIM का प्रभाव
सपा का वर्चस्व और परिवारवाद: संभल सीट से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता इकबाल महमूद लंबे समय से (सात बार से) विधायक हैं. इस बार उनके द्वारा अपने बेटे सुहैल इकबाल को चुनाव लड़ाने की चर्चा है. पत्रकारों का मानना है कि यदि परिवारवाद हावी हुआ तो पार्टी के भीतर टिकट के अन्य दावेदार (जैसे पूर्व जिला अध्यक्ष या सांसद परिवार के सदस्य) भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं.
AIMIM फैक्टर: वर्ष 2024 में हुई घटनाओं और सर्वे-हिंसा के बाद AIMIM यहां अपनी जमीन मजबूत करने और युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है. स्थानीय स्तर पर नेताओं के जुड़ने से यहां का मुकाबला दिलचस्प और त्रिकोणीय हो सकता है. हालांकि समाजवादी पार्टी का पारंपरिक आधार अभी भी मजबूत है.
3. असमोली विधानसभा सीट: सपा का मजबूत गढ़
असमोली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की पिंकी यादव लगातार तीन बार से विधायक हैं. जनपद के परिसीमन के बाद से इस सीट पर सपा का प्रभाव काफी मजबूत रहा है, हालांकि भाजपा और अन्य दलों द्वारा सेंधमारी के प्रयास जारी हैं.
4. चंदौसी सीट: बीजेपी का सबसे सुरक्षित और मजबूत किला
चंदौसी सुरक्षित विधानसभा सीट को संभल जिले में बीजेपी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता है. यहां से विधायक और योगी सरकार में मंत्री गुलाबो देवी द्वारा किए गए विकास कार्यों और उनकी जनप्रिय कार्यशैली के चलते यह सीट भाजपा के लिए सबसे मजबूत स्थिति में बताई जा रही है.
पत्रकारों के पैनल ने इस बात पर चिंता और चर्चा व्यक्त की कि चुनाव नजदीक आते ही कई बार ध्रुवीकरण के मुद्दे हावी हो जाते हैं, जबकि जनता को स्वास्थ्य, शिक्षा, कॉलेज, अस्पताल और बुनियादी विकास के मुद्दों पर वोट करना चाहिए.
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