Barhaj Assembly Seat: उत्तर प्रदेश की राजनीति में देवरिया जिले की बरहज विधानसभा सीट हमेशा से ही चर्चा का विषय रही है. कभी सोशलिस्टों का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा है. 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही यहां सियासी पारा चढ़ने लगा है. जहां बीजेपी अपनी जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है. वहीं समाजवादी पार्टी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है.
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विधायक दीपक मिश्रा 'शाका' का विकास का दावा
बीजेपी के वर्तमान विधायक दीपक मिश्रा 'शाका' का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में विकास के कई बड़े काम किए हैं. उन्होंने 'मोहन सेतु' (पुल) का उदाहरण देते हुए बताया कि इससे मऊ, देवरिया, कुशीनगर और आजमगढ़ सहित पूर्वांचल के कई जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है. उनका दावा है कि 2027 में भी बीजेपी विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर 300 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी.
सपा की तैयारी: 'बूथ लेवल' पर किया काम
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पिछले चुनाव के प्रत्याशी अपनी पिछली गलतियों को सुधारने में जुटे हैं. उनका कहना है कि 2022 में टिकट देर से मिलने के कारण कुछ कमियां रह गई थीं जिन्हें पिछले चार वर्षों में बूथ लेवल पर काम करके दूर किया गया है. सपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से संपर्क साध रहे हैं.
जातीय समीकरण: किसका पलड़ा भारी?
बरहज सीट पर जातीय समीकरण जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाते हैं. आंकड़ों के अनुसार:
दलित: लगभग 48,000
ब्राह्मण: 40,000
यादव: 38,000
वैश्य: 32,000
मुस्लिम: 18,000
इसके अलावा राजभर, निषाद और नोनिया समाज के वोटों पर भी सभी दलों की नजर है. बीजेपी को जहां अपने कोर ब्राह्मण और वैश्य वोटरों पर भरोसा है. वहीं राजभर और निषाद पार्टियों के गठबंधन से उसे अतिरिक्त मजबूती मिलती है.
क्या कहते हैं स्थानीय जानकार?
स्थानीय पत्रकारों और जानकारों का मानना है कि इस बार भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच ही रहने वाला है. हालांकि यूजीसी (UGC) जैसे मुद्दे चर्चा में हैं. लेकिन फिलहाल बीजेपी इस सीट पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है. लोग अब केवल स्थानीय मुद्दों पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और प्रादेशिक विकास को देखकर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं.
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