UP Election Matrize Survey: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है. सभी राजनीतिक दलों ने अपनी जमीनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. इसी चुनावी माहौल के बीच 'न्यूज तक' के खास शो 'साप्ताहिक सभा' में चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और 'Matrize' के फाउंडर मनोज सिंह के बीच विस्तार से बातचीत हुई. इस परिचर्चा में प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के सियासी मूड और क्षेत्रवार रुझानों का गहराई से विश्लेषण किया गया.
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क्या हैं एनडीए के लिए सर्वे के संकेत?
बातचीत की शुरुआत में मिलिंद खांडेकर ने 'Matrize' के नए सर्वे के आंकड़े रखे. इस पर मनोज सिंह ने बताया कि सामने आए ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाला एनडीए (NDA) गठबंधन लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करता दिख रहा है. राज्य की सभी 403 सीटों के क्षेत्रवार और दलवार आंकड़ों पर गौर करें, तो फिलहाल एनडीए चुनावी रेस में बढ़त बनाए हुए है.
सीटों का अनुमान और वोट शेयर का गणित
'Matrize' के ताजा सर्वे के अनुसार सीटों और वोट प्रतिशत की स्थिति इस प्रकार है:
सीटों का अनुमान (कुल 403 सीटें):
- NDA (एनडीए): 245 से 265 सीटें
- INDIA (इंडिया) गठबंधन: 135 से 155 सीटें
- BSP (बसपा): 1 से 3 सीटें
- अन्य (Others): 5 से 10 सीटें
वोट शेयर (Vote Share):
- NDA: 44 फीसदी वोट
- INDIA गठबंधन: 38 फीसदी वोट (दोनों प्रमुख गठबंधनों में 6% का अंतर)
- BSP: 8 फीसदी वोट
- अन्य: 10 फीसदी वोट
जातीय समीकरण और सियासी दलों की राह
उत्तर प्रदेश के चुनाव में हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जातीय ताने-बाने पर भी मनोज सिंह ने विस्तार से रोशनी डाली:
1. कुर्मी और कोइरी मतदाताओं का मूड
लोकसभा चुनाव में एनडीए से दूर छिटके कुर्मी और कोइरी जैसे ओबीसी मतदाताओं को लेकर चर्चा हुई कि क्या वे दोबारा बीजेपी के साथ आएंगे या सपा का रुख करेंगे. आंकड़ों के मुताबिक, यह वर्ग फिलहाल पूरी तरह से समाजवादी पार्टी में शिफ्ट होता नहीं दिख रहा है, जबकि मुस्लिम और यादव वोटर सपा के साथ मजबूती से डटे हुए हैं.
2. सवर्ण और ब्राह्मण वोटरों का रुख
विकास दुबे एनकाउंटर और ब्राह्मण समाज की कथित नाराजगी जैसे मुद्दों पर मनोज सिंह ने कहा कि यूपी का ब्राह्मण वर्ग आसानी से सपा के पाले में जाता नहीं दिखता. अगर वे मौजूदा सरकार से असंतुष्ट भी होते हैं, तो उनका झुकाव बसपा की तरफ हो सकता है या वे मतदान से दूरी बना सकते हैं. लेकिन सपा को वोट देने में झिझकते हैं. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में यूजीसी (UGC) जैसे विषयों की चर्चा भी बनी हुई है.
3. अनुसूचित जाति (SC) और लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा
जमीनी फीडबैक के हवाले से बताया गया कि ग्रामीण इलाकों के दलित और एससी मतदाता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मौजूदा सरकार के काम से काफी हद तक संतुष्ट हैं. रंगदारी, अवैध कब्जों और अपराध में आई कमी के कारण इस वर्ग का रुझान सरकार के प्रति सकारात्मक है, जिससे सपा के लिए एससी वोटों में सीधी सेंध लगाना आसान नहीं होगा.
मतदाताओं की सोच और राहुल-अखिलेश की रणनीति
मनोज सिंह के अनुसार, आज का वोटर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है. अब सिर्फ पारंपरिक नारों या पुराने मुद्दों पर चुनाव नहीं जीता जा सकता; जनता विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं को देखकर वोट कर रही है.
वहीं विपक्ष की रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सोच में अंतर दिख रहा है. अखिलेश यादव का पूरा ध्यान यूपी चुनाव और प्रदेश की राजनीति पर केंद्रित है, जबकि राहुल गांधी का फोकस 2029 के आम चुनावों पर अधिक नज़र आता है. इस वजह से धरातल पर विपक्षी गठबंधन की तरफ से जिस आक्रामक चुनाव प्रचार की उम्मीद थी, वह फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है.
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