UP News: यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज विरोध में उतर आया है. सवर्ण समाज के संगठन और छात्र इसका लगातार विरोध कर रहे हैं. इसी के साथ भाजपा का भी विरोध बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है. इसी बीच बाहुबली और भाजपा के पूर्व सांसदबृजभूषण शरण सिंह चर्चाओं में आ गए हैं. दरअसल इस बार बृजभूषण शरण सिंह अपने दोनों बेटों को लेकर चर्चाओं में हैं.
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दरअसल यूजीसी नियमों को लेकर हो रहे इस पूरे विवाद में बृजभूषण शरण सिंह के दोनों बेटे अलग-अलग रास्तों पर चलते हुए दिख रहे हैं. जहां बृजभूषण शरण सिंह के विधायक बेटे प्रतीक भूषण ने यूजीसी के नए नियमों का विरोध किया है तो उनके सांसद बेटे करण भूषण सिंह इस बिल के समर्थन में हैं.
नियम बनाने वाली कमेटी के सदस्य हैं सांसद करण
आपको बता दे कि बृजभूषण शरण सिंह के भाजपा सांसद बेटे करण भूषण सिंह उस संसदीय कमेटी का हिस्सा थे, जिसने यूजीसी के नए नियम बनाए हैं.
दूसरी तरफ बृजभूषण शरण सिंह के विधायक बेटे शरण भूषण ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया है. शरण सिंह ने सोशल मीडिया X पर लिखा, 'इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए जहाँ बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिह्नित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है.
संसदीय समिति में ये सब भी थे शामिल
इन नियमों को बनाने वाली संसदीय समिति के चैयरमेन कांग्रेस के राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह थे. उनके साथ राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, राज्यसभा सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य, राज्यसभा सांसद सुनीता अजित पवार, राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा, राज्यसभा सांसद भीम सिंह, राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवारी, राज्यसभा सांसद संगीता यादव और राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार शामिल थे.
इसी के साथ इस समिति में लोकसभा सांसद के तौर पर बृजमोहन अग्रवाल, रचना बनर्जी, दर्शन सिंह चौधरी, जितेंद्र कुमार दोहरे, वर्षा एकनाथ गायकवाड़, अभिजीत गंगोपाध्याय, हेमांग जोशी, संबित पात्रा, रवि शंकर प्रसाद, राजीव राय, जियाउर्रहमान बर्क, करण भूषण सिंह समेत अन्य सांसद भी थे.
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