UGC के नए नियमों पर सामान्य वर्ग का भारी विरोध, उधर इन 3 पॉइंट के साथ आया मायावती का पहला रिएक्शन

Mayawati Reaction on UGC: UGC के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026' को लेकर देशभर में छिड़े विवाद के बीच BSP प्रमुख मायावती ने कड़ा रुख अपनाया है. सामान्य वर्ग के विरोध के बीच मायावती ने 3 अहम बिंदुओं के जरिए अपनी बात रखी जिसमें उन्होंने इक्विटी कमेटी का विरोध करने वालों को जातिवादी मानसिकता वाला बताया.

Mayawati reaction on UGC

यूपी तक

28 Jan 2026 (अपडेटेड: 28 Jan 2026, 10:42 AM)

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Mayawati Reaction on UGC: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लाए गए नए नियमों पर घमासान छिड़ गया है. जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सामान्य वर्ग के छात्र इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताकर विरोध कर रहे हैं, वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने इस मामले में एंट्री मारते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है. मायावती ने न सिर्फ इन नियमों का बचाव किया है, बल्कि सरकार की कार्यशैली और जाति की राजनीति करने वाले कुछ नेताओं पर भी तीखा हमला बोला है.

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क्या हैं UGC के नए नियम (UGC Equity Regulations, 2026)?

UGC ने 13 जनवरी को 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने (Promotion of Equity) संबंधी नियम, 2026' अधिसूचित किए हैं. ये नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे. नए नियमों के तहत:

सभी सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में 'इक्विटी कमेटी' (समता समिति) बनाना अनिवार्य होगा. 

यह कमेटी भेदभाव की शिकायतों की जांच करेगी और कैंपस में समावेशी माहौल सुनिश्चित करेगी. 

कमेटी में अनिवार्य रूप से SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिला सदस्यों को शामिल करना होगा. 

मायावती ने 3 बिंदुओं में रखी अपनी बात

बसपा प्रमुख मायावती ने इस विवाद पर अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया है. उन्होंने 3 बिंदुओं में अपनी बात रखी है. 

1. जातिवादी मानसिकता पर प्रहार: मायावती ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के समाधान के लिए बनाई जा रही 'इक्विटी कमेटी' का विरोध करना कतई उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के केवल वही लोग इसका विरोध कर रहे हैं जो जातिवादी मानसिकता रखते हैं और इसे अपने खिलाफ साजिश मान रहे हैं.

2. सामाजिक तनाव और सरकार को सलाह: मायावती ने सरकार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना संवाद के ऐसे कदम देश में सामाजिक तनाव का कारण बन सकते हैं, जिस पर सरकारों और संस्थानों को ध्यान देना चाहिए.

3. दलित-पिछड़ों को चेतावनी: अपने तीसरे पॉइंट में मायावती ने दलितों और पिछड़ों को भी सतर्क किया. उन्होंने अपील की कि इन वर्गों के लोग अपने ही समाज के स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों में न आएं. उन्होंने कहा कि ऐसे नेता अपनी घिनौनी राजनीति चमकाने के लिए इन वर्गों का इस्तेमाल करते हैं.

मायावती के इस एक्स पोस्ट को यहां नीचे देखा जा सकता है. 


क्यों हो रहा है विरोध?

उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्र संगठनों और सामान्य वर्ग के समूहों का तर्क है कि इन नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है. आलोचकों का मानना है कि यह नियमों का नया ढांचा संस्थानों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है और इससे आपसी मनमुटाव बढ़ सकता है.

सरकार का दावा- कोई उत्पीड़न नहीं होगा

विरोध को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि नए ढांचे के तहत किसी का उत्पीड़न या भेदभाव नहीं किया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों का दुरुपयोग करने का अधिकार किसी के पास नहीं होगा और इसका उद्देश्य केवल समानता सुनिश्चित करना है.

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