UP News: यूपी Tak का खास शो आज का यूपी राज्य की राजनीतिक हलचलों और महत्वपूर्ण खबरों के विश्लेषण का एक विश्वसनीय मंच है. आज के अंक में हम राज्य की तीन सबसे बड़ी खबरों का विश्लेषण करेंगे. सबसे पहले, यूजीसी (UGC) बिल को लेकर भाजपा के भीतर बढ़ते अंतर्द्वंद और साक्षी महाराज व बृजभूषण शरण सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की असहजता पर चर्चा होगी. इसके बाद, अखिलेश यादव के 'भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ' के नए नारे और उनके सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड के सियासी मायने समझेंगे. अंत में, 2027 के चुनावी रण के लिए समाजवादी पार्टी की आईपैक (I-PAC) के साथ संभावित रणनीतिक साझेदारी और उसके बड़े प्रेजेंटेशन का विश्लेषण करेंगे.
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यूजीसी बिल पर भाजपा में अंतर्द्वंद, साक्षी महाराज और बृजभूषण की बढ़ती असहजता
यूजीसी बिल को लेकर उत्तर प्रदेश में भाजपा के बड़े नेताओं के सुर बदलते नजर आ रहे हैं. यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में बढ़ते विरोध ने सत्ता पक्ष को असहज कर दिया है.
साक्षी महाराज की चेतावनी
उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने सवर्ण समाज के विरोध पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर ओबीसी और एससी समाज इस विरोध को अपने खिलाफ मानकर एकजुट हो गया, तो यह भाजपा के लिए चुनावी संकट पैदा कर सकता है. उन्होंने इसे तूल न देने की सलाह दी है.
बृजभूषण शरण सिंह का ये है जमीनी आकलन
वहीं, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया कि इस बिल का विरोध गांवों में करंट की तरह फैल गया है. उन्होंने कहा कि केवल सवर्ण ही नहीं, बल्कि पिछड़ा और दलित समाज भी इस कानून के पक्ष में नहीं है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ दौरे पर बीच का रास्ता अपनाते हुए कहा था कि नियम का पालन होना चाहिए, लेकिन अगर कानून गलत है तो उसमें बदलाव की गुंजाइश भी होनी चाहिए.
अखिलेश यादव का सनातन कार्ड- भाजपा को उसी के पिच पर घेरने की तैयारी
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक नया राजनीतिक प्रयोग करते हुए सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पकड़ी है. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ का पोस्ट कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. उन्होंने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक वीडियो साझा करते हुए भाजपा पर सच्चे संतों के अपमान का आरोप लगाया.
अखिलेश यादव को लगता है कि शंकराचार्य के मुद्दे पर भाजपा का एक बड़ा पारंपरिक समर्थक वर्ग नाराज है. इसी वर्ग को साधने के लिए सपा अब सनातन के नाम पर भाजपा को घेर रही है.
मिशन 2027- समाजवादी पार्टी और आईपैक (I-PAC) का गठबंधन?
2027 के विधानसभा चुनाव को जीने-मरने का सवाल मानते हुए अखिलेश यादव अब प्रोफेशनल चुनावी मैनेजमेंट की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. लखनऊ में आईपैक की टीम ने अखिलेश यादव के सामने 2027 के चुनाव प्रबंधन को लेकर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इसमें चुनावी नारे, टिकट चयन के सर्वे और डिजिटल कैंपेन की रणनीति शामिल है.
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कोलकाता दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अखिलेश को आईपैक की सेवाएं लेने का सुझाव दिया था. आईपैक को ममता बनर्जी और स्टालिन जैसे नेताओं की जीत का सूत्रधार माना जाता है. 2027 में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए सपा अब इसी पेशेवर अनुभव का सहारा लेने की तैयारी में है.
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