Opinion: राम मंदिर केवल एक भौतिक संरचना नहीं है. यह करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है. सनातन धर्म की जीवंतता का प्रमाण है और पांच सौ वर्षों की संघर्ष-गाथा का साक्षात स्वरूप है. जब देश की संसद में इस पवित्र स्थल के चढ़ावे की चोरी को लेकर विपक्ष द्वारा ड्रामा रचा जा रहा है, तो वह मात्र राजनीतिक बहस नहीं बल्कि सनातन धर्म के प्रति गहरा अपमान और राम मंदिर को बदनाम करने की स्पष्ट मंशा है.
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जून 2026 में शुरू हुए इस विवाद की जड़ में कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित चोरी के मामले हैं. यह गंभीर मामला है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. लेकिन विपक्ष ने इसे राम मंदिर और समूचे सनातन पर हमले का हथियार बना लिया. संसद में हंगामा, प्रदर्शन, पोस्टर और आरोपों की बौछार-यह सब श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है.
31 जुलाई 2026 को संसद परिसर में विपक्ष ने जो अनोखा ड्रामा रचा, वह इस अपमान की पराकाष्ठा है. निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु/पुजारी के भेष में भगवा वस्त्र पहनकर मकर द्वार के सामने दानपेटी लेकर बैठ गए. राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से चढ़ावा चढ़ाया. पप्पू यादव ने पैसे जेब में रखकर “चोरी” का नाटक किया और दानपेटी लेकर भागने का अभिनय किया. नारे लगे-‘चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़’, ‘अमित शाह इस्तीफा दो’. यह नाटकीय प्रदर्शन राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी और छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया.
यह प्रदर्शन मात्र विरोध नहीं बल्कि आस्था के प्रतीक राम मंदिर को नाटकीय रूप से कलंकित करने की कोशिश है. सनातन धर्म में मंदिर आस्था के केंद्र होते हैं. लाखों-करोड़ों भक्त अपनी साधना, कमाई का हिस्सा और भावनाएं चढ़ाते हैं. राम मंदिर का निर्माण भी इसी आस्था का परिणाम था. जब विपक्षी नेता पुजारी के भेष में चोरी का नाटक करके संसद परिसर में इसे उछालते हैं तो वे न केवल मंदिर की गरिमा को कम करते हैं बल्कि उन करोड़ों भक्तों का अपमान करते हैं जिन्होंने अपनी श्रद्धा से मंदिर को सहारा दिया.
मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने कहा था कि “चोर हर जगह होते हैं. इससे मंदिर की गरिमा और सम्मान कम नहीं हो जाता. इस मंदिर के बनने में 500 साल लगे हैं. अगर कुछ लोगों ने गलत काम किया है, तो इससे मंदिर की पवित्रता पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए.” उन्होंने कहा था कि किसी घर में चोरी हो जाए तो लोग घर को दोष नहीं देते. जो हुआ गलत हुआ लेकिन सनातन धर्म और भगवान राम हमेशा से रहे हैं और आगे भी रहेंगे. दोषियों को पकड़कर सजा दी जानी चाहिए पर आस्था को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए. अनुपम खेर का यह बयान सही मायनों में राष्ट्रवादी और आस्तिक सोच को प्रतिबिंबित करता है.
विपक्ष का यह ड्रामा केवल संसद तक सीमित नहीं. सोशल मीडिया, प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयानों के जरिए एक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि पूरा ट्रस्ट और मंदिर प्रबंधन भ्रष्ट है. जबकि SIT जांच ट्रस्ट की ही शिकायत पर शुरू हुई थी, गिरफ्तारियां हुई हैं और प्रक्रिया चल रही है. फिर भी विपक्ष इसे “मोदी-योगी की नाकामी” बताकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है. 31 जुलाई का नाटकीय प्रदर्शन इसी पूर्वाग्रह को उजागर करता है.
राम मंदिर का महत्व केवल धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भी है. यह विभाजन की पीड़ा के बाद एकता का प्रतीक बना. अयोध्या में लाखों श्रद्धालु रोजाना आते हैं. चढ़ावा चोरी का मामला उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है. लेकिन संसद में इसे राजनीतिक हथियार बनाना, पुजारी बनकर चोरी का नाटक करना उस ठेस को और गहरा करता है. विपक्ष को चाहिए था कि वे जांच की मांग करते और दोषियों की सजा सुनिश्चित करने पर जोर देते, न कि राम मंदिर को बदनाम करने वाले बयानबाजी और स्टंट पर. यह मंशा साफ है-राम मंदिर को विवादित बनाकर हिंदू आस्था को कमजोर दिखाना.
भारतीय संस्कृति में मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, समाज के नैतिक आधार हैं. चोरी जैसे अपराध को रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था, बेहतर ऑडिट और कड़ी निगरानी जरूरी है. ट्रस्ट को भी सबक लेना चाहिए. लेकिन साथ ही राजनीतिक दल धर्म को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर रखें. सनातन धर्म अपमान सहन नहीं करता, वह अनंत काल से जीवित है. राम मंदिर की पवित्रता अक्षुण्ण रहेगी, चाहे कितने भी ड्रामे रचे जाएं.
इस घटना से एक बात स्पष्ट होती है-आस्था को राजनीति से अलग रखना होगा. दोषी सजा पाएं, लेकिन राम और सनातन पर कोई आंच न आए. संसद सत्ता संघर्ष का स्थान है, आस्था का अपमान करने का नहीं. राम मंदिर भारत की सांस्कृतिक जड़ों का प्रतीक है, इसे बदनाम करने की कोई भी कोशिश अंततः विफल होगी, क्योंकि करोड़ों हिंदू हृदयों में राम विराजमान हैं.
(लेखक डॉ. विनम्र सेन सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन करते हैं.)
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)
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