Opinion: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पिछले कुछ दिनों से खुद को शिवभक्त साबित करने की होड़ में लगे हैं. वे इटावा में भव्य केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं. इतना ही नहीं, जो अखिलेश यादव अपनी सरकारों में कांवड़ियों पर पाबंदियों का चाबुक चलाते थे, वे पिछले कुछ समय से अचानक कांवड़ियों के लिए 'स्पेशल कॉरिडोर' बनाने की मांग करने लगे हैं.
जाहिर है, यह समाजवादी पार्टी का नया 'सॉफ्ट हिंदुत्व' है, जो सियासी मजबूरी से उपजा है. लेकिन, क्या छवि को सुधारने की इन कोशिशों से समाजवादी पार्टी के पुराने पाप धुल जाएंगे? क्योंकि यूपी में जब भी कांवड़ यात्रा का जिक्र आता है, समाजवादी पार्टी का असली 'सनातन विरोधी' चेहरा बेनकाब हो जाता है.
खुद को शिवभक्त बताने वाले अखिलेश यादव और उनके नेताओं ने हमेशा कांवड़ियों को 'अनपढ़', 'बेरोजगार' और 'नफरती' बताकर सरेआम अपमानित किया है.
ऐसे में, एक तरफ मंदिर बनवाने का दिखावा और दूसरी तरफ सनातनियों की आस्था को गालियां...आइये, सपा की इस दोमुंही अवसरवादी राजनीति और इसके विपरीत योगी सरकार के 'विरासत और विकास' मॉडल की परत-दर-परत पड़ताल करते हैं.
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फ्लैशबैक: कांवड़ियों का सरेआम अपमान और भूले न जा सकने वाले जहरीले बोल
समाजवादी पार्टी की राजनीति हमेशा से तुष्टिकरण और सनातन विरोध पर ही आधारित रही है. याद कीजिए, पिछले साल जुलाई 2025 में कांवड़ यात्रा के दौरान सपा नेताओं ने जिस तरह का जहर उगला था, वह उनके असली वैचारिक डीएनए को साफ-साफ दिखाता है. खुद पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं का मखौल उड़ाते हुए शिवभक्तों का सरेआम अपमान किया था.
अखिलेश यादव ने कांवड़ यात्रा पर बेहद व्यंग्यात्मक लहजे में तंज कसते हुए कहा था कि अगर सरकार को कांवड़ियों की सेवा करनी ही है, तो सीओ और एसडीएम जैसे अधिकारियों को उनकी सेवा में लगाया जाए और उनसे कांवड़ियों के पैर दबवाए जाएं.
जाहिर है, जब पार्टी मुखिया की मंशा ही शिवभक्तों का उपहास उड़ाने की हो, तो बाकी नेता भला मौके को खाली कैसे जाने देते. सपा के सांसद राजीव राय ने तो कांवड़ उठाने वाले युवाओं को सीधे बेरोजगार ही घोषित कर दिया था.
उनका बयान था कि जब तक युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, वे इस तरह की गतिविधियों में भाग लेते रहेंगे और यह सरकार की विफलता का प्रतीक है.
सनातन आस्था का मखौल उड़ाने का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. सपा विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी का घमंड भरा बयान भला कोई हिंदू कैसे भूल सकता है.
उन्होंने कहा था कि कांवड़ यात्रा में गांव के अनपढ़ और अंधविश्वास में फंसे लोग ही हिस्सा लेते हैं. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि कांवड़ यात्रा में आईएएस, पीसीएस अधिकारियों के बच्चे, अनिल अंबानी का बेटा या भाजपा के किसी सांसद-विधायक का बेटा क्यों नहीं जाता.
इतना ही नहीं, ब्राह्मण की वेश्या से तुलना करने वाले सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कांवड़ परंपरा को खुलेआम गलत ठहराते हुए कहा था कि कांवड़ यात्रा बच्चों को पढ़ाई और विकास से विमुख करती है.
हद तो तब पार हो गई थी जब पूर्व सांसद एसटी हसन ने कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों की पहचान उजागर करने वाले पारदर्शी सरकारी आदेश की तुलना सीधे आतंकवाद और पहलगाम जैसी घटनाओं से कर डाली थी.
वहीं, अफजाल अंसारी ने जहर उगलते हुए कहा था कि कांवड़ यात्रा को बीजेपी ने नफरत की यात्रा बनाने के लिए खुराफात शुरू कर दिया है. इन सबके बावजूद अखिलेश नहीं रुके और उन्होंने अपनी सियासत के लिए कांवड़ यात्रा को भी पीडीए के चश्मे से बांटने का महापाप किया.
अपने राज में कांवड़ियों पर बंदिशें, अब इटावा में मंदिर का दिखावा
अखिलेश यादव की असली मंशा उनके वर्तमान ढोंग से भी उजागर होती है. आज वे इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करा रहे हैं और खुद को शिवभक्त दिखा रहे हैं.
लेकिन हकीकत क्या है? जब सत्ता उनके हाथ में थी, तब कांवड़ यात्रा में विघ्न डालने का कोई भी मौका उनकी सरकार ने नहीं छोड़ा था. सपा की सरकारों में कांवड़ियों के लिए सुविधाओं के नाम पर सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता होती थी.
आज जो सपा शिवभक्ति का ढोंग रच रही है, वह दरअसल सनातनियों की उसी एकजुटता का खौफ है जो प्रदेश में आज देखने को मिल रही है. वर्तमान डबल इंजन सरकार सनातनियों की सरकार है, जो कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत करती है.
योगी सरकार का 'मेरठ मॉडल' और गाजियाबाद की चाक-चौबंद व्यवस्था
सपा नेता भले ही वातानुकूलित कमरों में बैठकर कांवड़ियों को 'अनपढ़-बेरोजगार' समझें, लेकिन यूपी की योगी सरकार आस्था को पूरा सम्मान देती है. सरकार कांवड़ परंपरा को सुव्यवस्थित, सहज और निर्विघ्न बनाने के लिए सफलतापूर्वक कार्य कर रही है. आज यूपी में शिवभक्तों के लिए 'मेरठ मॉडल' लागू है.पश्चिमी यूपी के मुख्य केंद्र मेरठ रेंज में 969 किलोमीटर लंबा कांवड़ मार्ग शिवभक्तों के लिए पूरी तरह सुरक्षित किया गया है. जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नदी और नहरों के किनारे 157 नावें और 139 प्रशिक्षित गोताखोर मुस्तैद किए गए हैं. सुरक्षा के लिए 128 बैरियर लगाए गए हैं और भीड़ प्रबंधन के लिए 4 नए अस्थायी पुलिस थाने भी बनाए गए हैं.
गाजियाबाद पहले से लाखों कांवड़ियों का सबसे व्यस्त पारगमन मार्ग है. ऐसे में, सपा राज में जहां कांवड़िये जर्जर तारों से अक्सर हादसों का शिकार होते थे, वहीं आज योगी सरकार ने गाजियाबाद में लगभग 90,000 बिजली के खंभों को पीवीसी कवर से सुरक्षित कर दिया है और सभी ट्रांसफार्मर पूरी तरह ढक दिए गए हैं.
शिवभक्तों के विश्राम के लिए जिले में लगभग 300 कांवड़ शिविर लगाए गए हैं. आपात स्थिति के लिए मार्ग पर 65 एम्बुलेंस चौबीस घंटे तैनात हैं और अस्पतालों में 250 से अधिक बेड आरक्षित रखे गए हैं.
इन सबके बीच राज्य स्तर पर 14 सूत्री एक्शन प्लान कड़ाई से लागू किया गया है. डीजे के लिए 10 फीट ऊंचाई और 12 फीट चौड़ाई के स्पष्ट मानक तय हैं. कांवड़ यात्रा रूट की शुचिता को बरकरार रखने के लिए मांस, मदिरा की बिक्री पूरी तरह बैन है और किसी भी छद्म पहचान वाले विक्रेता को रूट के पास फटकने नहीं दिया जाएगा.
गूगल मैप्स से डिजिटल मैपिंग, 'जीरो प्लास्टिक' अभियान और पारदर्शी नेमप्लेट नीति लागू है. इतना ही नहीं, ड्रोन व कमांड कंट्रोल सेंटर के जरिए 24×7 लाइव निगरानी हो रही है. जाहिर है, इन कदमों ने प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के उपद्रव को बर्दाश्त न करने की योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस नीति' का साक्षात्कार करा दिया है.
(लेखक, बृज लाल, राज्यसभा सांसद एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश रहे हैं.)
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)
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