जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में गए बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर की गई नौकरी, सत्यम पंडित से पिटने वाले छात्र आयुष से मिलकर बोले- 'मैं भी पीड़ित'

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के बाद बरेली के डिग्री कॉलेज के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित भारद्वाज ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. वह वायरल वीडियो वाले छात्र आयुष रंजन से मिले और खुद को भी इस मामले का पीड़ित बताया.

Ayush and Mohit Bhardwaj Jantar Mantar Protest

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Mohit Bhardwaj Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद बरेली के एक डिग्री कॉलेज के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित भारद्वाज ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. डॉ. भारद्वाज हाल ही में उस छात्र आयुष रंजन से मिलने पहुंचे, जिसके साथ जंतर-मंतर जाते समय मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था. इस दौरान उन्होंने कहा कि आयुष की तरह वह खुद भी इस पूरे घटनाक्रम के पीड़ित हैं.

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'जंतर-मंतर गया, लौटकर आया तो नौकरी चली गई'

डॉ. मोहित भारद्वाज ने कहा कि वह 18 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने गए थे. इसके बाद जब 22 जुलाई को बरेली लौटे तो उन्हें बताया गया कि बहेड़ी के गन्ना उत्पादक डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं. उन्होंने कहा, "मुझे कह दिया गया कि अब कल से आपकी सेवा समाप्त की जाती है. आप कॉलेज नहीं आएंगे."

आयुष रंजन के घर पहुंचे मोहित भारद्वाज

डॉ. भारद्वाज आयुष रंजन के घर पहुंचे और उनके परिवार से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि आयुष एक शिक्षित परिवार से हैं. उनके पिता और माता दोनों शिक्षक रहे हैं. उन्होंने जंतर-मंतर जाते समय आयुष के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वायरल वीडियो में एक व्यक्ति (खुद को हिंदूवादी बताने वाला शख्स सत्यम पांडित) ने उनसे पूछा था कि क्या वह प्रदर्शन में क्यों जा रहे हैं. गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर जो छात्र आंदोलन चल रहा था उसके समर्थन में जा रहे दो छात्रों को सत्यम पंडित नाम के युवक ने थप्पड़ मारा था. 

'क्या वंदे मातरम और भारत माता की जय कहना देशद्रोह है?'

डॉ. भारद्वाज ने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या वंदे मातरम कहना देशद्रोह है? क्या इंकलाब जिंदाबाद कहना देशद्रोह है? क्या भारत माता की जय कहना देशद्रोह है? क्या अपना अधिकार मांगना देशद्रोह है?" उन्होंने कहा कि अगर कोई सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाता है या किसी के दुख में साथ खड़ा होता है तो उसकी आवाज दबाने की कोशिश की जाती है.

'एक इस्तीफा हुआ है, अभी बहुत आने बाकी हैं'

डॉ. मोहित भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था का अंत होना जरूरी है. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्होंने कहा, "अभी पहला इस्तीफा हुआ है. आगे अभी लड़ाई शुरू हुई है, पूरी कहानी बाकी है."

'युवा बदलाव चाहता है'

उन्होंने कहा कि आज का युवा पारदर्शिता, बेहतर शिक्षा और बेहतर व्यवस्था चाहता है. उनके मुताबिक 16-16 साल के छात्र भी प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं और गलत बातों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं में बदलाव की इच्छा है और इतिहास में भी कई बड़े बदलाव युवाओं ने ही किए हैं.

'लोगों को बुलाकर नहीं लाया गया था'

डॉ. भारद्वाज ने उन दावों पर भी सवाल उठाए जिनमें कहा गया कि प्रदर्शन में लोगों को बुलाकर लाया गया था. उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं, उन्हें खुद जंतर-मंतर जाकर वहां की स्थिति देखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वहां पीने के पानी तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. कई बुजुर्ग और दिव्यांग लोग भी अपनी इच्छा से प्रदर्शन में पहुंचे थे.

प्रधानमंत्री पर भी साधा निशाना

डॉ. मोहित भारद्वाज ने कहा कि देश में जो माहौल बना है, उसे प्रधानमंत्री भी जानते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने संसद में जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी.