Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कनिष्ठ लिपिक (टाइपिस्ट क्लर्क) का डिमोशन करके चपरासी बना दिया है. रेहान खान को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली थी. वह लगातार तीन बार हिंदी टाइपिंग की परीक्षा में फेल हो गया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है. जानकारी के मुताबिक, कलेक्ट्रेट में इस तरह का यह पहला मामला है, जिसके बाद पूरे जिले में इस कार्रवाई की जमकर चर्चा हो रही है.
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2021 में मिली थी सरकारी नौकरी
रेहान खान को 5 जुलाई 2021 को मृतक आश्रित कोटे के तहत मीरगंज तहसील में कनिष्ठ लिपिक के पद पर नियुक्ति मिली थी. नियम के अनुसार, इस पद पर बने रहने के लिए हिंदी टाइपिंग (टंकण) की परीक्षा पास करना जरूरी होता है. रेहान ने पहली बार 25 सितंबर 2023 को परीक्षा दी थी, जिसमें वह फेल हो गया था. इसके बाद उसे दूसरा मौका दिया गया था. इसकी परीक्षा 21 जून 2024 को हुई थी. वह इस परीक्षा में भी फेल हो गया था.
तीन बार फेल, फिर हुआ डिमोशन
लगातार दो बार फेल होने के बाद रेहान खान को 8 सितंबर 2026 को तीसरा और अंतिम अवसर दिया गया था. इस बार भी वह परीक्षा को पास नहीं कर पाया और फेल हो गया. लगातार फेल होने के बाद डीएम अविनाश सिंह ने शासनादेश के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए16 सितंबर को आदेश जारी किया. इस आदेश के तहत रेहान को कनिष्ठ लिपिक के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी में चपरासी के पद पर तैनात कर दिया गया है.
बाकी कर्मचारियों को मिली वार्निंग
रेहान खान के डिमोशन के बाद जिलाधिकारी कार्यालय के बाकी कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है. प्रशासन ने टाइपिंग परीक्षा में फेल होने वाले अन्य मृतक आश्रित कर्मचारियों को मोहलत दी है. राहुल कुमार और लक्ष्मी सक्सेना को तीसरा और अंतिम मौका दिया गया है, जबकि कंचित चौधरी और नेहा जोशी को दूसरा मौका मिला है. इन सभी को टाइपिंग की तैयारी के लिए दो महीने का समय दिया गया है. यदि ये कर्मचारी भी टाइपिंग की परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उचित कार्रवाई हो सकती है.
डीएम ने मामले पर क्या कहा
इस पूरी कार्रवाई पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और कुशलता में सुधार लाया जा रहा है. रेहान खान को नौकरी के समय टाइपिंग नहीं आती थी, इसलिए उसे प्रैक्टिस करने के कई मौके दिए गए थे, लेकिन वह तीनों बार फेल हो गया. इसी वजह से शासनादेश के तहत उसका डिमोशन किया गया है. डीएम ने चेतावनी देते हुए कहा है कि राहुल कुमार और लक्ष्मी समेत जो अन्य कर्मचारी टाइपिंग में फेल हुए हैं, उन्हें सहानुभूति के तौर पर दो महीने का आखिरी मौका दिया गया है. अगर वे इस अवधि में काम नहीं सीखते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमों के तहत ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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