Opinion: प्रयागराज के हंडिया से समाजवादी पार्टी के विधायक हाकिम लाल बिंद पर दो सगे भाइयों की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज है. लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद से पिछले 15 दिनों से विधायक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं. अब तक उन्होंने अपना बयान दर्ज नहीं कराया है. पुलिस का कहना है कि उनके मोबाइल फोन बंद हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी की टॉप लीडरशिप की चुप्पी को लेकर हो रही है.
ADVERTISEMENT
प्रदेश में अपराध, कानून-व्यवस्था और PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के मुद्दे पर लगातार भाजपा सरकार को घेरने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अब तक इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. न पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही विधायक के खिलाफ किसी संगठनात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने आई है.
जमीन कब्जाने का है विधायक पर आरोप
जिन दो सगे भाइयों की मौत का मामला सामने आया है, वे दलित समाज से थे. मृतकों के परिजनों का आरोप है कि पुश्तैनी जमीन के विवाद को लेकर पहले छोटे भाई और फिर 22 दिन बाद बड़े भाई की हत्या कर उनके शव फंदे से लटका दिए गए. इसी मामले में हाकिम लाल बिंद समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है.
पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन उसका कहना है कि विधायक जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. हंडिया पुलिस के मुताबिक, विधायक के मोबाइल फोन बंद हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. पुलिस उनके घर भी पहुंची, लेकिन वह वहां नहीं मिले.
सपा की टॉप लीडरशिप पर क्यों उठ रहे सवाल
राजनीतिक तौर पर यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि समाजवादी पार्टी पिछले कई महीनों से PDA को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक अभियान बता रही है. पार्टी लगातार दावा करती रही है कि वह पिछड़ों, दलितों और वंचित समाज की आवाज उठाती है. वहीं कानून-व्यवस्था के हर मुद्दे पर सरकार से जवाब भी मांगती रही है. ऐसे में अपनी ही पार्टी के विधायक पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लगने और पुलिस के संपर्क से बाहर होने के बावजूद शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी विपक्ष और राजनीतिक हलकों में सवालों का विषय बन गई है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन अब जब उनकी ही पार्टी के विधायक पर दलितों की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है, तब वह खामोश हैं. अपने विधायक पर कार्रवाई करना तो दूर, उन्होंने अब तक इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी भी नहीं की है.
जब बात अपने नेताओं पर आती है तो सपा क्यों हो जाती है चुप?
हालांकि, यह पहला मामला नहीं है जब अपने नेताओं पर लगे आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठे हों. इससे पहले चंदौली में सपा की एक महिला कार्यकर्ता के साथ मारपीट के मामले में भी अखिलेश यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी. अमेठी में विधायक महाराजी प्रजापति के आवास पर हुए हमले के मामले में भी वह खामोश रहे. पूर्वांचल में हुई कई चर्चित हत्याओं पर भी उनकी प्रतिक्रिया नहीं आई. वहीं गाजियाबाद में सूर्या चौहान हत्याकांड पर भी उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया.
ऐसे में विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि जब किसी अपराध के मामले में समाजवादी पार्टी के नेताओं का नाम सामने आता है, या फिर आरोप मुस्लिम और यादव समुदाय से जुड़े लोगों पर लगते हैं, तो अखिलेश यादव चुप्पी साध लेते हैं.
(लेखक भावेष पांडेय इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अधिवक्ता हैं. राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं.)
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)
ADVERTISEMENT











