T-20वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की जीत के बाद मंगेतर रिंकू सिंह के लिए MP प्रिया सरोज ने लिखा ये इमोशनल पोस्ट

T20 वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बीच रिंकू सिंह के संघर्ष की कहानी ने सबको भावुक कर दिया है. पिता के निधन के बावजूद देश के लिए मैदान पर डटे रहने वाले रिंकू के लिए सांसद प्रिया सरोज ने एक बेहद इमोशनल पोस्ट लिखा है.

यूपी तक

• 09:55 AM • 10 Mar 2026

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8 मार्च का दिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया जब टीम इंडिया ने ICC T20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया. इस यादगार जीत के बाद जहां पूरा देश जश्न में डूबा था, वहीं रिंकू सिंह का दिल पिता के जाने के गम से भारी था. 27 फरवरी को उनके पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया था.लेकिन रिंकू ने अपने व्यक्तिगत दुख को किनारे रखकर देश की उम्मीदों को पहले चुना. रिंकू के इसी जज्बे को सलाम करते हुए उनकी मंगेतर और समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने एक ऐसा भावुक पोस्ट लिखा जिसने सोशल मीडिया पर हर किसी को इमोशनल कर दिया. 

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प्रिया सरोज का दिल छू लेने वाला पोस्ट

सांसद प्रिया सरोज ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'कुछ दिन स्याही से लिखे जाते हैं. लेकिन 8 मार्च जैसे दिन इतिहास में दर्ज हो जाते हैं.इस ऐतिहासिक जीत के बीच मैंने एक बेटे की ताकत भी देखी जो अपने पिता, टीम और देश के लिए डटकर खड़ा रहा. जीवन के सबसे कठिन पलों में चैंपियन बनकर निकलना अद्भुत साहस की बात है.' उन्होंने रिंकू को दुनिया के लिए असली ताकत का उदाहरण बताया.

पिता के निधन के बाद भी नहीं छोड़ा साथ

रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह लंबे समय से लिवर कैंसर (स्टेज 4) से जूझ रहे थे. 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले उनकी तबीयत बिगड़ी, तो रिंकू परिवार के पास पहुंचे. 27 फरवरी को उनके निधन के बाद रिंकू घर लौटे. लेकिन देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाते हुए वे दोबारा टीम से जुड़ गए.वे चाहते तो वर्ल्ड कप बीच में छोड़ सकते थे. लेकिन उन्होंने मैदान पर उतरकर अपने पिता के सपनों को पूरा करना बेहतर समझा.

प्रशंसकों का उमड़ा प्यार

प्रिया सरोज के पोस्ट पर फैंस ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी.आशीष कुमार नाम के यूजर ने लिखा 'खुशी थी लेकिन खुलकर नहीं हंस सका क्योंकि दिल का एक कोना गम से भरा था.' वहीं अन्य यूजर्स ने रिंकू को 'भारत का गर्व' और 'दृढ़ व्यक्तित्व' वाला खिलाड़ी बताया. प्रशंसकों का मानना है कि रिंकू ने साबित कर दिया कि असली चैंपियन वही है जो हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ा रहे.

एक बेटे की जीत, एक पिता का गौरव

8 मार्च की यह जीत सिर्फ टीम इंडिया की नहीं बल्कि उस बेटे की भी थी जिसने अपने आंसुओं को दबाकर पूरे देश को मुस्कुराने की वजह दी.रिंकू सिंह का यह समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.