उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 125 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें बैंक के कर्मचारी भी शामिल थे, जो अपराधियों को फर्जी खाते खोलने और बड़ी रकम के लेन-देन में मदद पहुँचा रहे थे.
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फर्जी GST फर्म और म्यूचुअल अकाउंट का जाल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने ठगी की रकम को खपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था:
- फर्जी फर्में: आरोपियों ने कुल 24 फर्जी जीएसटी (GST) फर्में बनाई थीं, जिनका इस्तेमाल कागजों पर व्यापार दिखाकर पैसे घुमाने के लिए किया जाता था.
- म्यूचुअल अकाउंट: ठगी के पैसों को सुरक्षित रखने और निकालने के लिए 16 म्यूचुअल अकाउंट खोले गए थे.
- बैंक कर्मियों की भूमिका: गिरफ्तार आरोपियों में बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं, जो बिना उचित सत्यापन के फर्जी खाते खोलते थे और संदिग्ध ट्रांजेक्शन को छुपाने में मदद करते थे.
छापेमारी और गिरफ्तारी
कानपुर के बर्रा क्षेत्र में की गई छापेमारी के बाद पुलिस ने गिरोह के 8 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है.
- बरामदगी: पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल फोन और डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं.
- बड़ा ट्रांजेक्शन: जांच के दौरान एक ही खाते से 66 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है, जिससे इस घोटाले की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है.
देशव्यापी नेटवर्क और पुलिस की अपील
यह गिरोह केवल कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से इस गैंग के खिलाफ 'डिजिटल अरेस्ट' और निवेश के नाम पर ठगी की शिकायतें मिल रही थीं. पुलिस अब बैंक कर्मचारियों के पूरे नेटवर्क की छानबीन कर रही है ताकि सिस्टम में बैठे अन्य 'विभीषणों' को पकड़ा जा सके.
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